कांग्रेस में वर्चस्व की जंग: असल युद्ध अभी 18 दिसंबर के बाद है

  • 12 Nov 2017
  • Reporter: समाचार फर्स्ट डेस्क

ललित खजूरिया।। चुनावों के दौरान हुए भीतरघात को लेकर लगता है कांग्रेस ने सबक सीख लिया है। अब अनुशासन को देते हुए प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पार्टी में उन कार्यकर्ताओं के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है जिन्होंने ने  पार्टी में रहकर खिलाफ काम किया। पार्टी के भीतर ये रार चुनावों से पहले भी थी और अब भी बरकरार है। हालांकि, पीसीसी अध्यक्ष की इस कार्रवाई को भी कुछ जानकार पार्टी के भीतर जारी वर्चस्व की जंग का ही दूसरा पहलू मान रहे हैं। जिसे सुक्खू बनाम वीरभद्र सिंह की आतंरिक सियासत का नतीजा बताया जा रहा है।

याद रहे कि पार्टी में रार चुनावों से पहले ही शुरू हो गई थी. तब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सरेआम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुक्खू के खिलाफ टिप्पणी की थी। तब से दोनों की बीच रार देखने को मिल रही है। हालांकि चुनाव के दौरान दोनों कई मर्तबा मंच पर एक साथ दिखे लेकिन दोनों के बीच कभी संवाद होते नहीं देखा गया। दोनों ही नेता अपनी-अपनी धाक पार्टी में दिखाने की कोशिश करते दिखाई दिए। हालांकि, चुनावी मजबूरी की वजह से कई मौकों पर इन्होंने ख़ामोशी इख़्तियार करना ही सही समझा। खामोशी अपनाने के पीछ कहीं ना कहीं हाईकमान से मिला निर्देश भी बड़ा कारण था। चुनाव से ऐन पहले भी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के साथ दोनों नेताओं की बैठक इसी बात की ओर इशारा भी करती है। अब चुनाव संपन्न हो चुके हैं और सुखविंद्र सिंह सुक्खू एक- एक कर भीतरघात (ख़ासकर संगठन के खिलाफ) करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।  

सुक्खू ने अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री वीरभद्र पर उस वक्त हमला किया जब उन्होंने मतदान से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री के करीबी अतुल शर्मा पर पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में शामिल और अनुशासनहीनता की कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के खिलाफ मुख्यमंत्री ने निंदा भी की थी और साफ कहा था कि ये कार्रवाई व्यक्तिगत द्वेष के कारण की गई है और अब चुनाव संपन्न होने के बाद पार्टी में वर्चस्व को लेकर लड़ाई देखी जा रही है। जिसकी तस्दीक सुक्खू ने शनिवार को 15 कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित करके किया।

सुक्खू के इन फैसलों को लेकर पार्टी का कोई भी नेता अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, सिवाय मुख्यमंत्री के। ऐसे और भी कई फैसले सुक्खू ने लिए हैं जिसके जरिए वे वीरभद्र को पार्टी में अपनी हैसियत और ताकत दिखाने से नहीं चूक रहे हैं। माना ये भी जा रहा है जो रार दोनों नेताओं में चुनावों से पहले देखने को मिल रही थी वो रार अब भी बरकरार है और ये आने वाले दिनों में और खुलकर सामने आ सकती है। फिलहाल चुनावों का नतीजा 18 दिसंबर को आना है लेकिन उससे पहले सुक्खू ने अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है।