नोटबंदी के 2 साल पूरे: जानिए, क्या खोया और क्या पाया देश ने

  • 08 Nov 2018
  • Reporter: मृत्युंजय पूरी, धर्मशाला

आज से ठीक  2 साल पहले यानी कि 8 नवंबर 2016 को रात 8:00 बजे प्रधानमंत्री ने अचानक 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी।  यह भारत में सबसे बड़ी घटना मानी गई है।  जिसकी पूरे दुनिया में चर्चा हुई थी।  इस फैसले की वजह से देश की 86% मुद्रा एक ही झटके में चलन से बाहर हो गई थी। पूरा देश अपने हजार और 500 के नोट बदलने में बैंकों में टूट पड़े थे।  एटीएम में हर जगह बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिली थी जिसमें कई लोगों की जानें भी गई थी।  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा इस फैसले का लेना हिंदुस्तान से भ्रष्टाचार,कालाधन,जाली नोट और आतंकवाद के खिलाफ माना जा रहा था।लेकिन विरोधी खेमे की तरफ से इसे  इसकी तुलना एक तुगलकी फरमान से की जा रही थी। 

हालांकि प्रधानमंत्री ने इस आपदा से निपटने के लिए लोगों से 50 दिन का समय मांगा था लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी लोग अभी तक उस  नोट बंदी के दंश  से उभर नहीं पाए हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को हुआ नोट बंदी का फायदा

इस नोट बंदी से हालांकि सरकार को टैक्स के नाम पर थोड़ी बहुत राशि आनी शुरू हुई है।  लेकिन वह सब छोटे  व्यापारी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं जो दिन रात मेहनत कर अपनी रोजी-रोटी कमाते थे। इस नोट बंदी का सबसे ज्यादा फायदा ऊंचे व्यापारियों और ऑनलाइन शॉपिंग वालों को हुआ है क्योंकि हर जगह पर अब ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ गया है। अगर चंबा शहर की बात करें तो एक छोटे से शहर में रोजाना एक गाड़ी ऑनलाइन शॉपिंग के समान कि यहां पहुंचती है। इस बात से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां छोटे-मोटे व्यापारियों पर उस बात का कितना असर पड़ रहा होगा। यानी कि इस नोट बंदी से छोटे व्यापारी धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं।

नोट बंदी के कारण आरबीआई को हुआ घाटा

इस नोट बंदी की वजह से जहां सरकार को काला धन वापस लाने की पूरी संभावना थी वही आरबीआई की माने तो 99.9% जो   बैंकों में वापस आ चुका है। बैंकों द्वारा छापे गए करीब 10720 करोड रुपए की करेंसी वापस नहीं आ पाई जिसके लिए रिजर्व बैंक ने 8000 करोड रुपया नए नोट छापने में खर्च कर दिया था। कुल मिलाकर कहा जाए तो आरबीआई को 35 या 36 हजार  करोड रुपए का इस नोट बंदी के कारण घाटा हुआ है।  अगर सरकार को फायदे की बात करें तो कैश ट्रांजैक्शन में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी दर्ज की गई है लोग  क्रेडिट कार्ड एटीएम के जरिए लोग अब पैसे का लेनदेन कर रहे हैं जिसमें मात्र 18% की वृद्धि दर्ज की गई है। 

इस नोट बंदी की वजह से सरकार को बहुत ही नुकसान झेलना पड़ा है साथ ही लोगों को भी इसके लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। जब नोटबंदी हुई तो उस समय लोगों को घंटों लाइन में खड़े हो नोट बदला ने पढ़ रहे थे। आज भी अगर आपको पैसे निकालना है तो आपको काफी समय तक एटीएम मशीन के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।  बहुत से ऐसे ATM  हैं जो काम नहीं कर रहे हैं और लोगों को वहां से निराश होकर वापस जाना पड़ता है।

आज तक नोटबंदी की मार को झेल रहे छोटे व्यापारी

आज तक उस नोटबंदी की मार को झेल रहे छोटे व्यापारियों को भी इस नोट बंदी से काफी नुकसान हुआ है सरकार ने जो जीएसटी के दायरे में छोटे व्यापारी को लाया उस कानून के तहत उन सभी छोटे व्यापारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है लेकिन यह जितनी भी पॉलिसी है यह सब कॉरपोरेट सेक्टर  और ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले व्यापारियों के हित में ही जा रही हैं और जो छोटे व्यापारी है सरकार द्वारा बनाए गए कानून के कागजी मकड़जाल में ही फंसे हुए हैं जिसकी वजह से  लोग ऑनलाइन शॉपिंग  कर रहे हैं और यह छोटे व्यापारी धीरे धीरे इतिहास के पन्नों में दफ़न होते  जा रहे हैं।

नोट बंदी की वजह से कोई खास फायदा नहीं हुआ

आम लोगों और व्यापारियों की बात करें तो लोगों ने बताया कि इस नोट बंदी की वजह से कोई खास फायदा नहीं हुआ है हालांकि इससे सरकार को थोड़ा बहुत टैक्स में बढ़ोतरी हुई है।  लेकिन छोटे व्यापारियों को इससे काफी नुकसान हुआ है।  लोगों ने बताया कि जिस तरह से 1000 और 500 के नोट बंद कर दिए थे और बाद में 2000 के नोट चालू कर दिए उससे कालाबाजारी और बढ़ गई है।  लोगों ने बताया कि स्विस बैंक की माने तो इस साल स्विस बैंक में जो पैसा जमा है उसमें से 50% जो पैसा है वह भारत से आया है तो इस बात से साफ जाहिर होता है कि जो भ्रष्टाचार है और जो कालाबाजारी है वह और ज्यादा बड़ी है।