आख़िर ये क्या ज़रूरी या फ़िर मज़बूरी, बीजेपी को उधार का उम्मीदवार लेकर लड़ना पड़ रहा है वार्ड का चुनाव

  • 29 Dec 2018
  • Reporter: पी. चंद, शिमला

ये दो तस्वीरें है जो मीरा शर्मा की है। एक तस्वीर डेढ़ साल पहले की है जब मीरा सीपीआईएम छोड़कर कांग्रेस पार्टी में आई थी और सांगटी वार्ड से कांग्रेस की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीती भी। दूसरी तस्वीर बीते शुक्रवार की है जब मीरा ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहकर बीजेपी का दामन थाम लिया। सूत्रों के अनुसार सांगटी उपचुनाव में मीरा आज बीजेपी की तरफ से नामांकन दाख़िल करने वाली है।

अब सवाल उठ रहे हैं कि जब मीरा शर्मा को दोवारा चुनाव लड़ना था फिर दो माह पूर्व इस्तीफ़ा क्यों दिया। क्योंकि आज पार्षद का चुनाव भी कम खर्चीला नहीं रहा है। सवाल बीजेपी पर भी उठ रहे हैं कि इतने बड़े वार्ड में क्या बीजेपी को कोई प्रत्याशी ही नहीं मिला जो उधार के उम्मीदवार से काम चलाना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात शिक्षा मंत्री को स्वयं भट्टाकुफर जाकर मीरा शर्मा को पार्टी में शिमला करना पड़ा।

इस फ़ैसले से बीजेपी के ही कई नेता और कार्यकर्ता नाराज़ नज़र आ रहे हैं। दबी जुबान से कई नेता इसका विरोध कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त के साथ ये नेता कह रहे है कि बीजेपी के पास उम्मीदवारों की कमी नहीं है बाबजूद इसके शिक्षा मंत्री मनमानी कर इस तरह के फैसले लेकर पार्टी की छवि खराब करने में लगे हैं।