पंजाब के फायदे के लिए दांव पर ब्यास नदी, बिजली उत्पादन के लिए नियमों की अनदेखी

  • 15 May 2018
  • Reporter: नवनीत बत्ता

शास्त्रों से लेकर पौराणिक कथाओं और इतिहास के पन्नों में ब्यास नदी कि विशालकाय जलधाराओं की विस्तृत उल्लेख बाखूबी मिलता है। लेकिन, आज के दौर में ब्यास नदी अपने अस्तीत्व से काफी दूर जाती दिखाई दे रही है। बिजली उत्पादन की लालसा की मार अब ब्यास नदी कि धाराओं पर पड़ने लगी है। एनजीटी के आदेशों को भी धत्ता बताते हुए जलधाराओं का दोहन धड़ल्ले से चल रहा है। आलम ये कि पंडोह से आगे ब्यास नदी सूखने की कगार पर है।

जानकारी के मुताबिक एनजीटी के निर्देश के मुताबिक पंडोह डैम से 15 फीसदी तक पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जिसकी वजह से ब्यास नदी का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। दरअसल, एनजीटी ने पहले ही प्रोजेक्ट चलाने वाली कंपनियों को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि नियमानुसार पानी छोड़ा जाए। लेकिन यह आदेश ब्यास नदी में पूरी तरह से लागू नहीं हो रहे हैं। हैरानी यह है कि इस बारे में न तो प्रशासन ही कुछ कर रहा है और ना ही सरकार ही कोई कड़े कदम उठा रही है।

गौरतलब है कि ब्यास नदी पर बने पंडोह डैम के जरिए सलापड़ में बीबीएमबी डैहर प्रोजैक्ट से बिजली उत्पादन का काम किया जा रहा है। सारा का सारा पानी विद्युत उत्पादन में लगा दिया जा रहा है। जिससे कंपनी को तो लाखों का फायदा हो रहा है, जबकि ब्यास नदी का जलस्तर कम होने से आम जनता को पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है। साथ ही नदी की मछलियों का भी भविष्य खतरे में है। गनीमत यह है कि इस नदी के अस्तित्व को थोड़ा बहुत बचाने में पंडोह से निकलने वाली एक खड्ड ज्यूणी बचा रही है। बाकि पानी ऊहल नदी से आ रहा है। जिससे बिंद्रावणी के पास थोड़े पानी का ईजाफा हो रहा है।

ऊहल नदी पर शानन प्रोजेक्ट चल रहा है जिसके चलते इससे भी आठ से दस फीसदी पानी ही लोगों को नदी से उपलब्ध हो पा रहा है। पंडोह डैम से नाम मात्र पानी ही छोड़ा जा रहा है। डैम पर कार्यरत कर्मियों का कहना है कि पीछे से ही पानी आ रहा है जिसके चलते डैम में भी पानी की कमी महसूस की जा रही है।

तीन फीसदी पानी छोड़ा जा रहा 
 
सूत्रों के मुताबिक डैम से तीन फीसदी तक ही पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी करीब 15 फीसदी तक छोड़ा जाना चाहिए था। लेकिन ज्यादा कमाई के चलते बीबीएमबी ऐसा करने में पूरी तरह से नाकाम हो गई है। बीबीएमबी का यह प्रोजैक्ट पंजाब का प्रोजैक्ट है यानि की हिमाचल के हितों को नुकसान पहुंचा कर कंपनी पंजाब का भला कर रही है। 
 

इस मामले में डीसी मंडी का कहना है कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं है। बावजूद इसके अगर कोई नियम में कोताही बरती गई है तो कार्रवाई की जाएगी।