धर्मशाला: नेशनल खेलने आए खिलाड़ियों के साथ धोखा, सड़कों पर सोने को मजबूर हुए खिलाड़ी

  • 18 Jul 2018
  • Reporter: मृत्युंजय पुरी

धर्मशाला में खेल विकास बोर्ड गेम्स के नाम पर खिलाड़ियों के साथ धोखा किया जा रहा है। राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों से पंजीकरण के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। प्रतियोगिता के लिए देश भर के 22 राज्यों से आने वाले करीब दो हजार से भी अधिक खिलाड़ियों से 2500-2500 रुपये प्रति खिलाड़ी पंजीकरण के लिए जा रहे हैं।

खिलाड़ियों की मानें तो यह पहली ऐसी प्रतियोगिता हो रही है, जहां पर खिलाड़ियों के पंजीकरण के नाम पर इतनी धनराशि वसूली जा रही है। फेडरेशन और एसोसिएशन की जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में पंजीकरण के नाम पर फीस नहीं ली जाती है।

यदि पंजीकरण फीस ली भी जाए, जो वह 100 या 200 रुपये तक होती है। खेलकूद प्रतियोगिता में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन एसोसिएशन और फेडरेशन के माध्यम से किया जाता है।

सड़कों पर रात बिता रहे खिलाड़ी

बच्चों से  पैसे ले लिए लेकिन, खिलाड़ियों को खाना और रुकने की जगह के साथ उनका अभी तक एक भी मैच नहीं हुआ हैं। सड़कों पर बच्चे रात बिता के अपना समय काट करे हैं। आपको बता दें कि खेल विकास बोर्ड द्वारा यह नेशनल गेम्स करवाई जा रही है बोर्ड की बड़ी नाकामी देखने को मिल रही है। बच्चों से करोड़ों रुपये तो ले लिए गये लेकिन, देश भर से आये खिलाड़ी एक भी मैच नहीं खेल पाए।

आपको बता दें की हिमाचल के खेल मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने इस गेम्स की ओपनिंग की थी। यह गेम्स धर्मशाला मे पुलिस ग्राउंड में हो रही है लेकिन ना ही इस गेम्स मे कोई नियम ना ही कोई कायदा अपनाया जा रहा है। आपको बता दे की यह गेम्स 17 जुलाई से 19 जुलाई तक होनी है लेकिन, हजारों बच्चे इस गेम्स में आए हैं और लगभग हजारों बच्चों का कोई भी मैच खबर लिखे जाने तक अभी तक नहीं हुई है

 खिलाड़ियों से 2500 रुपये लिए लेकिन मैच एक भी नहीं

धर्मशाला पुलिस ग्राउंड में जो नेशनल टूर्नामेंट करवाया जा रहा है वहां कोई भी फेसिलिटी नहीं है हर खिलाड़ी से 2500 रुपये लिए गये हैं। लेकिन बच्चों को अभी तक मैच तक नहीं करवाया जा रहा है। क्रिकेट की करीब 5 से 10 टीमें हैं लेकिन, इतने रुपये लेने के बाद भी अभी तक क्रिकेट का एक भी मैच नहीं हुआ है। हैरानी की बात तो है की कुछ खिलाड़ी आंध्र प्रदेश से आए हैं। लेकिन यहां उनके ना रहने का और ना ही खाने का कोई इंतजाम है।