गुड़िया केस: सूरज हत्याकांड में बड़ा मोड़, HC ने CBI को सील्ड कवर में रखे शपथ पत्र खोलने के दिए आदेश

  • 21 Sep 2018
  • Reporter: समाचार फर्स्ट डेस्क

देवभूमि हिमाचल को हिला देने वाले गुड़िया रेप एंड मर्डर केस से जुड़े सूरज कस्टोडियल मर्डर मामले में बड़ा मोड़ आया है।  हिमाचल हाईकोर्ट ने सूरज की हत्या के आरोपी पुलिस कर्मियों के सील्ड कवर में रखे गए शपथपत्रों को खोलने के आदेश जारी किए हैं। यही नहीं, इन शपथपत्रों की कॉपी सीबीआई सहित अन्य पक्षकारों को सौंपे जाने के भी आदेश जारी किए गए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने सीबीआई के आवेदन का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को उपरोक्त आदेश जारी किए हैं। मामले पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत से आग्रह किया था कि उसे गुड़िया रेप मामले में फिलहाल गवाह बनाए गए पुलिस कर्मी दीपचंद के शपथपत्र की प्रतिलिपि दी जाए ताकि उस गवाह के होने वाले बयान और शपथपत्र में दी गई जानकारी आपस में परखी जा सके। दीपचंद इस केस में जांच अधिकारी था।

सीबीआई ने कहा कि वह इस मामले में बनाए गए अन्य सभी निजी प्रतिवादी पुलिसकर्मियों के शपथपत्र भी चाहती है। सीबीआई ने आवेदन के माध्यम से सभी शपथपत्रों की प्रतिलिपि भी हाईकोर्ट से मांगी थी। अदालत ने सीबीआई के आवेदन का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि वह कानून के अनुसार शपथपत्रों को हासिल कर इनका इस्तेमाल ट्रायल में कर सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस कर्मियों के शपथपत्र लेने का मकसद यह था कि वे मामले की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। यह शपथपत्र इसलिये भी लिए गए ताकि जांच के दौरान उनके ध्यान में आई सभी बातें सामने आ सके। आखिरकार क्यों न सच्चाई को सबके सामने लाया जाए।

बता दें कि गुड़िया मामले में पुलिस जांच के दौरान पकड़े गए कथित आरोपी सूरज की लॉकअप में हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान वाली मौजूद जनहित याचिका में तत्कालीन एसआइटी प्रमुख पूर्व आईजी जहूर जैदी समेत 8 पुलिस कर्मियों को प्रतिवादी बनाया और सभी से उनके द्वारा इस मामले में की गई जांच का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के माध्यम से देने के आदेश दिए थे। सभी प्रतिवादी पुलिस कर्मियों ने अपने-अपने शपथपत्र सील्ड कवर में दायर किये थे।

जांच एजेंसी सीबीआई ने सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दायर करने से पहले भी यह शपथपत्र मांगे थे, लेकिन हाईकोर्ट ने यह शपथपत्र सौंपने से इनकार कर दिया था क्योंकि सीबीआई जांच अभी लंबित थी। अब जबकि दोनों ही मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए सीबीआई इन शपथपत्रों में दी गई जानकारियों का इस्तेमाल ट्रायल के दौरान कर सकेगी।