सब्र कीजिये नये नवेले "नेताजी" (भावी विधायक जी) मीटिंग में हैं - PA

  • 16 Oct 2019
  • Reporter: धर्मराज सिंह

अभी सर बिजी हैं ... ! अभी सर मीटिंग में है ...! या कई दफे दर्जनों बार फोन की घंटी बजने पर कोई जवाब नहीं । नेता जी को जानने वाले अभी संशय में हैं कि अभी तो कुछ हफ्ते पहले की ही बात है । फोन मिलाने पर नेता जी की आवाज दूसरी तरफ से आती थी । मिस्ड काल हो जाने पर नेता जी वापसी में फोन खड़का देते थे । पता किया तो पता चला कि नेता जी ने PA रख लिया है । अब वही PA ही नेता जी के फोन का जवाब देता है ।

हिमाचल प्रदेश में दो सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं और करीब दर्जन भर नेता जी इस चुनाव में अपना किस्मत आजमा रहे हैं । लेकिन इन सब के बीच एक नेता जी की चर्चा अभी उनके PA रखने को लेकर और फोन का जवाब नहीं देने को लेकर ज्यादा हो रही है । नेता जी की उम्र भी ज्यादा नहीं है । कह सकते हैं चुनावी राजनीति का ये उनका पहला इंटर्नशीप हो रहा है और इंटर्नशीप के दौरान नेताजी का रुख लोगों को चौंका भी रहा है । जनता कह रही है कि इंटर्नशीप में ये हाल है तो नौकरी लग जाने के बाद ये माननीय बन जायेंगे । फिर उन तक कैसे पहुंचेंगे ।

इसके साथ ही जनता के मन में ये भी चल रहा है  कि चुनाव के वक्त तो बड़े बड़े मंत्री संत्री तक खुद फोन उठा लेते हैं । फोन करो या मिलो तो जमकर आवभगत होती है । लेकिन, ये इंटर्नशीप वाले नये रंगरुट का अंदाज सबसे जुदा लग रहा है । अभी वोटिंग भी नहीं हुई और नेता जी खुद को विधायक मान बैठे हैं । ऐसे में कहीं अगर जनता ने गच्चा दे दिया तो माननीय नेता जी की भविष्य में बुरी हालत हो सकती है ।

लब्बोलुआब ये है कि नेता को जनता से कभी भी कटना नहीं चाहिये । चुनाव के वक्त तो कभी नहीं । कई बार सियासत में दिखावा भी करना पड़ता है । संभवत नये नये भावी नेता जी राजनीति का ये पहला अध्याय समझ नहीं पाये हैं । देश भर में हजारों उदाहरण पड़े हैं । जहां बड़े बड़े राजनेताओं का सामाज्रय धारासायी सिर्फ इसीलिये हो गया क्योंकि वो जनता से कट गये । अभी भी देर नहीं हुई है । जब जागो तब सवेरा । नेता जी को अपने आस पास के बड़े नेताओं से ये अदा भी सिखनी चाहिये ।  

अगर नहीं सीखते हैं तो कोई भी फैक्टर आपको चुनाव जीतवा नहीं सकता और अगर जीत भी गये तो बहुत बड़ी बात नहीं है । लोकतंत्र में कोई पद 99 साल के लिये लीज पर नहीं मिलता । आपको हर पांच साल में जनता की अदालत में जाना ही पड़ेगा और इस बार जो दर्जन भर उम्मीदवार हैं, उनको तो तीन साल बाद ही जाना है ।  ऐसे में राजनीतिक जीवन की शुरुआत में ही राजा वाली फीलिंग बहुत हार्ड चोट पहुंचायेगी ............ जरा संभल के नेताजी !!