नैना देवी मंदिर: पौराणिक कथा से जानें कैसे बिलासपुर में बना ये शक्तिपीठ....

  • 09 Apr 2019
  • Reporter: पी. चंद

बिलासपुर का नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर  में है। शिवालिक पर्वत श्रृंखला पर स्थित ये भव्य देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल हैं।  यह समुद्र तल से 11000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माना जाता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। इसलिए इसका नाम नैना देवी पड़ा। मंदिर के प्रांगण में पीपल का पेड़ मुख्य आकषर्ण का केन्द्र है। कहा जाता है कि ये पेड़  सदियों पुराना है। मंदिर के मुख्य द्वार के दाई ओर भगवान गणेश और हनुमान कि मूर्ति है।  मंदिर के समीप ही में एक गुफा है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव के अपमान के बाद देवी सती ने खुद को यज्ञ में जिंदा जला लिया, जिससे भगवान शिव व्यथित हो गए | उन्होंने सती के शव को कंधे पर उठाकर भटकना  शुरू कर दिया। जिससे स्वर्ग में सभी देवता भयभीत हो गए। भगवान शिव का यह रूप प्रलय ला सकता था। देवताओं ने भगवान विष्णु से यह आग्रह किया कि अपने चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में काट दें। ऐसा करने पर श्री नैना देवी मंदिर में माता सती की आंखें गिरीं थी इसी पर यहां का नाम नैना देवी पड़ा।

मंदिर को लेकर एक अन्य कथा भी मिलती है जो कि नैना नाम के गुज्जर लड़के की है। बताया जाता है कि एक बार गुज्जर लड़का अपने मवेशियों को चराने गया जंगल मे उसने  देखा कि एक सफेद गाय अपने थनों से एक पत्थर पर दूध बरसा रही है। ये सिलसिला उसने कई दिनों तक  देखा। एक रात स्वप्न्न में  देवी मां ने उससे कहा कि वह पत्थर उनकी पिंडी है। नैना गुज्जर ने अपने सपने के बारे में राजा बीर चंद को बताया। जब राजा  ने देखा कि सच मे ही ऐसा हो रहा है। तब राजा ने उसी स्थान पर श्री नयना देवी नाम के मंदिर का निर्माण करवाया।

श्री नैना देवी मंदिर महिशपीठ नाम से भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर मां श्री नयना देवी जी ने महिषासुर का वध किया था। किंवदंतियों के अनुसार, महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस था जिसे श्री ब्रह्मा द्वारा अमरता का वरदान प्राप्त था, लेकिन उस पर शर्त यह थी कि वह एक अविवाहित महिला द्वारा ही परास्त हो सकता था। इस वरदान के कारण, महिषासुर ने पृथ्वी और देवताओं पर आतंक मचाना शुरू कर दिया | राक्षस के साथ सामना करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को संयुक्त किया और एक देवी को बनाया जो उसे हरा सके। देवी को सभी देवताओं द्वारा अलग अलग प्रकार के हथियारों की भेंट प्राप्त हुई। महिषासुर देवी की असीम सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गया और उसने शादी का प्रस्ताव देवी के समक्ष रखा। देवी ने उसे कहा कि अगर वह उसे हरा देगा तो वह उससे शादी कर लेगी। लड़ाई के दौरान, देवी ने दानव को परास्त किया और उसकी दोनों आंखें निकाल दीं।

एक और कहानी सिख गुरु गोबिंद सिंह जी के साथ जुडी हुई है। जब उन्होंने मुगलों के खिलाफ अपनी सैन्य अभियान 1756 में छेड़ दिया, वह श्री नैना देवी गये और देवी का आशीर्वाद लेने के लिए एक महायज्ञ किया। आशीर्वाद मिलने के बाद, उन्होंने सफलतापूर्वक मुगलों को हरा दिया।

नैना देवी हिंदूओं के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह स्थान नैशनल हाईवे न. 21 से जुड़ा हुआ है। इस स्थान तक पर्यटक अपने निजी वाहनों से भी जा सकते हैं।  पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए 1.25 कि.मी. की पैदल यात्रा कि जाती थी परन्तु अब मंदिर प्रशासन द्वारा मंदिर तक पहुंचने के लिए उड़नखटोला का प्रबंध किया है।