छात्र अभिभावक मंच ने फिर दी निजी स्कूलों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

  • 26 May 2019
  • Reporter: पी. चंद, शिमला

निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को डेढ़ महीना बीतने के बावजूद भी उच्चतर शिक्षा निदेशक द्वारा जारी न करने के खिलाफ छात्र अभिभावक मंच तीसरे चरण का आंदोलन शुरू करेगा। इस बाबत अगले तीन दिन के भीतर छात्र अभिभावक मंच की बैठक करके आगामी रणनीति तय की जाएगी।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को चेताया है कि वे शीघ्र ही इंस्पेक्शन रिपोर्ट को सार्वजनिक करें अथवा आंदोलन के परिणामों को भुगतने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा है कि अब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है इसलिए शिक्षा निदेशक द्वारा इंस्पेक्शन रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने के संदर्भ में कोई भी तर्क नहीं सुना जाएगा।

उन्होंने शिक्षा अधिकारियों पर छात्रों व अभिभावकों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने उच्चतर  शिक्षा निदेशक से मांग की है कि निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को तुरन्त सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने चेताया है कि अगर इंस्पेक्शन रिपोर्ट तुरन्त सार्वजनिक न की तो मंच ने तीसरे चरण के आंदोलन की रूपरेखा लगभग तैयार कर ली है जिसे आगामी तीन दिनों में मंच की बैठक करके लागू कर दिया जाएगा।

मंच ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय पर हुए महाधरने के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक ने कई टीमें बनाकर प्रदेश में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपा था। प्रदेश भर के निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन की कार्य अवधि को डेढ़ महीने बीत चुका है। अधिसूचना के हिसाब से 22 अप्रैल तक सभी निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट उच्चतर शिक्षा निदेशक के टेबल पर होनी चाहिए थी। उन्होंने शिक्षा निदेशक से पूछा है कि वह अपनी ही अधिसूचना व निर्णय का मखौल क्यों बना रहे हैं। वे इन स्कूलों की रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने के पीछे उन पर आखिर किसका दबाव है।

 उन्होंने कहा कि अभिभावक केवल कागजी कार्यवाही व लीपापोती से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। अभिभावकों को जमीनी स्तर पर निजी स्कूलों की लूट व मनमानी के खिलाफ ठोस कार्रवाई चाहिए। अगर शिक्षा विभाग ने इस पूरे मसले पर संतोषजनक कार्रवाई न की तो निश्चित तौर पर शिक्षा विभाग के खिलाफ अभिभावक और ज़्यादा मुखर होकर दोबारा से सड़कों पर उतर आएंगे। उन्होंने कहा है कि शिक्षा अधिकारियों को तब तक चैन से नहीं सोने दिया जाएगा जब तक कि निजी स्कूलों की मनमानी,लूट व भारी फीसों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लायी जाती है।