कुल्लू: कनौन में बूरी शक्तियों से बचने के लिए निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा

  • 09 Jul 2019
  • Reporter: गौरव, कुल्लू

जिला कुल्लू की सैंज घाटी के सैंज की ग्राम पंचायत कनौन में हूम मेले में देव परंपरा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। देवता ब्रहमा और देवी भगवती के हूम मेले में देव हारियनों द्वारा लगभग 70 फुट लकड़ी की जलती मशाल को कंधे पर उठाकर देव कार्यविधिनुसार गांव की परिक्रमा कर देव कारज को निभाया। इस देव कारज को देखने के लिए कनौन में देवी भगवती के मंदिर में हजारों श्रदालुओं ने हाजरी भरी।

मान्यता है कि इस दिन देवी भगवती ज्वाला रूप धारण कर सभी की मनोकामना पूरी करती है। देव समाज से जुडे़ लोगों की माने तो हर वर्ष आषाढ़ महिने में देवी भगवती लक्ष्मी व देवता ब्रह्मा अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हूम, जागरते पर्व का आयोजन करते है।

देवी के गूर झावे राम ने बताया कि क्षेत्र में घटने वाली प्राकृतिक आपदा व बूरी आत्माओं तथा भूत पिशाच की नजरों से बचने के लिए इस हूम पर्व का आयोजन किया जाता हैं। उन्होंने बताया कि इस पर्व में मशाल जलाने का कारण यह है कि देवी भगवती इस मशाल में ज्वाला रूप धारण कर उक्त परिस्थितियों से निजात दिलाती है। इस दौरान अश्लील गालियां निकाली गई।