प्राकृतिक खेती से आय होगी दोगुनीः रामलाल मारकंडे

  • 10 Jul 2019
  • Reporter: रिकी योगेश

बुधवार को दिल्ली से शिमला जाते हुए हिमाचल सरकार में कृषि मंत्री रामलाल मारकंडे ने सोलन सब्जी मंडी में चल रहे किसानों और आढ़तियों के विवाद को लेकर बात की और कहा कि सोलन सब्जी मंडी में किसान तोल के हिसाब से अपना टमाटर बेच सकेंगे। उन्होंने किसानों और आढ़तियों के बीच चल रहे गतिरोध के बारे में कहा कि सोलन सब्जी मंडी में 3 वेइंग मशीने स्थापित की जा रही है। किसान चाहे तो वजन के हिसाब से भी अपना उत्पाद बेच सकता है। टमाटर बेस्ड उद्योग के बारे में कृषि मंत्री ने कहा इसके लिए पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा पूरी रूपरेखा तैयार की गई है, जल्द ही इसके टेंडर लगवाए जाएंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि सोलन सब्जी मंडी  में किसान तोल के हिसाब से अब टमाटर बेच सकेंगे। किसानों से किसी भी तरह की बेइंसाफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोलन सब्जी मंडी में किसानों को टमाटर का पर्याप्त रेट मिले इसके लिए टमाटर तोलने की मशीने लगा दी गयी है।

2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्राकृतिक खेती पर अधिक जोर दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती करने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है। यह खेती जैविक एवं रसायनिक खेती से बिल्कुल अलग है। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में भाग लेने के बाद शिमला जा रहे कृषि मंत्री रामलाल मारकंडे ने यह बात बताई। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में मौजूदा समय में 19 हज़ार किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और 34 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्राकृतिक खेती में लागत ना के बराबर है और उत्पादन दोगुना है। यदि किसान प्राकृतिक खेती को अपनाता है तो उसे ऋण लेने की आवश्यक्ता नहीं पड़ेगी और ना ही किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाएगा।  कृषि मंत्रियों के सम्मेलन के बारे में राम लाल मार्कंडेय ने कहा कि इसमें उन्होंने अनेक सुझाव दिए है।


वहीं, उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इन सुझाव पर केंद्र सरकार जल्द ही गौर करेगी जिसका फायदा किसानों को होगा।  खासतौर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में मौजूदा समय पर 70 लाख के करीब जनसंख्या है। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री बीमा योजना के अंतर्गत 8.90 लाख किसान ही जुड़ पाएं हैं। इसके पीछे कारण यह है कि प्रधानमंत्री बीमा योजना के नियम एवं शर्तों को कुछ किसान पूरा नहीं कर पाते। यदि इन नियम एवं शर्तों को सरल किया जाए तो कम से कम अब तक  20 लाख किसान इससे जुड़ चुके होते।