स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन पर्व को लेकर देश भर में उत्साह, दोनों पर्व एक ही दिन

  • 14 Aug 2019
  • Reporter: पी. चंद

भारत को पर्वधर्म वाला देश कहा जाता है। यहां सालभर मेलों और त्योहारों का सिलसिला जारी रहता है। इसमें यदि भाई बहन के पवित्र रिश्ते रक्षाबंधन त्यौहार की बात करें तो ये पर्व अपनी अलग पहचान रखता है। ये त्यौहार रिश्तों के महत्व को दर्शाता है। कच्चे धागे के इस बंधन की बड़ी अहमियत है। भाई बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक राखी आपसी स्नेह का प्रतीक है।

रक्षा बंधन का वर्णन पुराणों में भी मिलता है। कहा जाता है कि राजा बलि के यज्ञ के बाद जब विष्णु भगवान ने तीन पग में राजा बली का सब कुछ छीन लिया। तब भगवान ने बली को वरदान मांगने के लिए कहा?  भगवान विष्णु द्वारा राजा बलि को दिए अपने वचन के पालन को पूरा करने के लिए राजा बलि का द्वारपाल बनना पड़ा। भगवान विष्णु को स्वयं से दूर होने पर माता लक्ष्मी को बहुत पीड़ा हुई। कहा जाता है कि माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांगा था और अपने साथ ले आई उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी तब से लेकर रक्षाबंधन पर्व मनाया जा रहा है।

एक अन्य कथा के अनुसार कृष्ण भगवान की अंगुली में जब शिशुपाल के वध के समय सुदर्शन चक्र से घाव बन गया तब द्रोपदी ने अपने पल्लू को फाड़कर कृष्ण भगवान की अंगुली में बांधा था। जब  भरी सभा मे दुशासन ने द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा तब भगवान कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाकर राखी के कर्ज़ का फर्ज निभाया था।

राखी बंधन के साथ कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं लेकिन इस पर्व का निचोड़ एक ही है। वह है संबंधों की डोर को मजबूती प्रदान करना। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधती है तो वहीं भाई भी बदले में बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है। यह सिलसिला सदियों से चला आ रहा है और जब तक सृष्टि है तब तक जारी रहेगा।