भाई-बहन के स्नेह, त्याग और समर्पण का प्रतीक है भाई दूज

  • 15 Nov 2020
  • Reporter: समाचार फर्स्ट डेस्क

भाईदूज का पर्व भाई-बहन के स्नेह, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है। भाई दूज एक विशेष त्योहार है जिसे भारत में भाई और बहन के बीच बंधन मनाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घर भोजन के लिए बुलाती है और उन्हें प्यार से खाना खिलाती हैं। रक्षाबंधन की तरह से त्योहार भी भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है। भाईदूज पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और सुख-समृद्धि के साथ खुशहाली की कामना करती हैं।

ऐसा माना जाता है कि इस खास दिन पर हिंदू धर्म में मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए। यमुना ने कई बार यमराज को बुलाया था लेकिन वह उन्हें दर्शन देने में असमर्थ थे। हालांकि, एक बार जब यमराज ने यमुना का दौरा किया, तो उनका बहुत प्यार और सम्मान के साथ स्वागत किया गया। यमुना ने अपने माथे पर तिलक भी लगाया,  इतना प्यार पाने के बाद यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। उसकी बहन ने यमराज को हर साल एक दिन चिह्नित करने के लिए कहा जहां वह उसे देखने जाएंगे। इस प्रकार, हम भाई दूज को भाई और बहन के बीच के बंधन को मनाने के लिए मनाते हैं।

भाई दूज की पूजन विधि

इस दिन सुबह नहा धोकर अपने भाई को घर पर भोजन के लिए बुलाएं, अगर वो साथ में रहता है तो कोई बात नहीं है फिर भी उसे एक बार खाने पर बुलाएं ऐसा कहें। इसके बाद भाई को एक पाट पर बैठाकर बहन अपने भाई को घी और चावल का टीका लगाती है, फिर भाई की हथेली पर सिंदूर, पान, सुपारी और सूखा नारियल यानी गोला भी रखती है। भाई के हाथ पर कलावा बांधा जाता है और उनका मुंह मीठा किया जाता है।इसके साथ ही उसकी लंबी आयु, स्वस्थ जिवन, सफलता आदि की कामना करें और इसके बाद भाई की आरती करें औऱ उसके बाद उसे भजोन करवाएं।