देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही गुरु रविदास की 644वीं जयंती

  • 27 Feb 2021
  • Reporter: समाचार फर्स्ट डेस्क

27 फरवरी यानी आज संत रविदास जयंती है। इन्हें संत रैदास और भगत रविदास के नाम से भी जाना जाता है। इस बार गुरु रविदास की 644 वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। समाज में फैले भेद-भाव, छुआछूत का वह जमकर विरोध करते थे। जीवनभर उन्होंने लोगों को अमीर-गरीब हर व्यक्ति के प्रति एक समान भावना रखने की सीख दी।उनका मानना था कि हर व्यक्ति को भगवान ने बनाया है, इसलिए सभी को एक समान ही समझा जाना चाहिए। वह लोगों को एक दूसरे से प्रेम और इज्जत करने की सीख दिया करते थे। संत रविदास की एक खासियत ये थी कि वे बहुत दयालु थे। दूसरों की मदद करना उन्‍हें भाता था। कहीं साधु-संत मिल जाएं तो वे उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटते थे

हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु रविदास जी का जन्म माघ माह की पूर्णिमा तिथि को सन 1398 में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन रविदास का जन्म हुआ था उस दिन रविवार था। इसी के चलते इनका नाम रविदास पड़ा। गुरू रविदास जयंती को दुनियाभर के लाखों द्वारा बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं इनके जन्म और जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातें। माघ पूर्णिमा यानी 27 फरवरी शनिवार को रविदास जयंती है। इनकी जयंती बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। इस दौरान जयंती का समय अर्थात पूर्णिमा का समय 26 फरवरी, शुक्रवार दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से लेकर 27 फरवरी, शनिवार दोपहर 1 बजकर 45 मिनट तक का है।

कहां हुआ था रविदास का जन्म

ऐसा कहा जाता है कि गुरु रविदास जी का जन्म यूपी के काशी में हुआ था। ऐसे में इनके जन्मदिन यानी माघ पूर्णिमा के दिन दुनियाभर से लाखों लोग काशी पहुंचते हैं। यहां पर भव्य उत्सव मनाया जाता है। साथ ही रविदास जयंती को सिख धर्म के लोग बेहद ही श्रद्धा से मनाते हैं। इस दिन के दो दिन पहले गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ किया जाता है। इसे पूर्णिमा के दिन समाप्त किया जाता है। इसके बाद कीर्तन दरबार होता है। साथ ही रागी जत्था गुरु रविदास जी की वाणियों का गायन करते हैं।
 
देशभर में माघ पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास जी का जन्म दिवस बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।  इस दिन लोग कीर्तन जुलूस निकालते हैं। इस दौरान गीत- संगीत, गाने, दोहे सड़कों पर बने मंदिरों में गाए जाते हैं। संत रविदास जी के भक्त उनके जन्म दिवस के दिन घर या मंदिर में बनी उनकी छवि की की पूजा करते हैं। संत रविदास जी का जन्म वाराणसी के पास के गांव में हुआ था। यही कारण है कि वाराणासी में संत रविदास जी का जन्म दिवस बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है।  इसमें उनके भक्त सक्रिय रुप से भाग लेने के लिए वाराणसी आते हैं।