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कैंसर से हार गए पूर्व सैनिक, बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज

  • पूर्व सैनिक सूबेदार मेजर पूर्ण चंद गुलेरिया का लंबी कैंसर की जंग के बाद निधन, सैंकड़ों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

  • बेटे की गैरमौजूदगी में बहादुर बेटियों ने निभाया अंतिम संस्कार का दायित्व, पिता की अर्थी को कांधा देकर समाज में मिसाल पेश की

  • सेना और स्थानीय समुदाय ने पूर्व सैनिक को दी श्रद्धांजलि, व्यापार मंडल और क्षेत्र की बड़ी हस्तियों ने जताया शोक


Daughters perform last rites: मंडी जिला के जोगेंद्रनगर में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर पूर्ण चंद गुलेरिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह पिछले दस वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे और चंडीगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार देर रात बालकरूपी स्थित अपने निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वीरवार को जब उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, तो सैंकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।

अंतिम संस्कार के दौरान परिवार पर भावनात्मक क्षण आया, जब बेटे की अनुपस्थिति में उनकी दो बेटियों, सुमन और सुनीता, ने पिता की अर्थी को कांधा देकर बेटे का फर्ज निभाया। बेटियों ने न केवल अपने पिता की सेवा पूरी निष्ठा से की, बल्कि समाज में एक नया उदाहरण भी पेश किया कि बेटियां भी बेटे के समान हर कर्तव्य निभाने में सक्षम हैं।

शहर से करीब दो किलोमीटर दूर बालकरूपी से लक्ष्मी बाजार स्थित मोक्षधाम तक विशेष वाहन से उनकी शव यात्रा निकाली गई। वहां पर परिवार के करीबी सदस्य संदीप गुलेरिया ने अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं और मुखाग्नि दी।

पूर्व सैनिक की पत्नी पवना देवी ने बताया कि उनके बेटे प्रदीप गुलेरिया का निधन दो दशक पहले ही हो गया था, जिसके बाद उनकी दोनों बेटियां ही पिता की सेवा में लगी रहीं। अंतिम क्षणों तक उन्होंने पिता की देखभाल की और अंत में उनकी अंतिम यात्रा में भी बेटे की भूमिका निभाई।

व्यापार मंडल के पूर्व महासचिव रूपेश सैन, संजीव गुलेरिया, रमन बहल समेत क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने पूर्व सैनिक के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना से जुड़े कई लोगों और स्थानीय नागरिकों ने इस मौके पर पूर्ण चंद गुलेरिया को याद करते हुए कहा कि वे न केवल एक बहादुर सैनिक थे, बल्कि एक आदर्श पिता भी थे, जिन्होंने अपने परिवार को संस्कारों की मजबूत नींव दी।

पूर्व सैनिक की बेटियों द्वारा निभाए गए इस कर्तव्य की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। यह घटना समाज के लिए एक प्रेरणा है कि बेटियां किसी भी परिस्थिति में अपने परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभा सकती हैं।