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हिमाचल में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक बोर्ड निलंबित, प्रशासक नियुक्त

कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक धर्मशाला का निदेशक मंडल निलंबित
आरबीआई-नाबार्ड निर्देशों की अनदेखी, भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
चेयरमैन समेत 20 निदेशकों को कारण बताओ नोटिस, प्रशासक नियुक्त


हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक धर्मशाला के निदेशक मंडल को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बैंक की बिगड़ती प्रशासनिक स्थिति, वित्तीय अनियमितताओं और आरबीआई व नाबार्ड के दिशा-निर्देशों की लगातार अनदेखी के चलते की गई है। पंजीयक सहकारी समितियों की सिफारिश पर निदेशक मंडल को हटाते हुए मंडलायुक्त कांगड़ा विनोद कुमार को बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।

सरकार ने साथ ही बैंक की एक अगस्त से शुरू हुई चुनाव प्रक्रिया को भी रद्द कर दिया है। मौजूदा संकट और आपदा की स्थिति के बीच चुनाव करवाना असंभव बताया गया है। अब नए चुनाव तब होंगे जब बारिश-बाढ़ की स्थिति सामान्य होगी और वर्तमान बोर्ड के खिलाफ कार्यवाही पूरी हो जाएगी।

बैंक के चेयरमैन कुलदीप सिंह पठानिया समेत 20 निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उन्हें 10 दिन में जवाब देने को कहा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो उन्हें पद से हटाने के साथ-साथ भविष्य के सहकारी चुनावों से अयोग्य ठहराया जा सकता है।

पंजीयक की रिपोर्ट में 2015-16 से 2024 तक की नाबार्ड निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर लगातार वित्तीय अनियमितताएं, कुप्रबंधन और कानूनी उल्लंघन उजागर किए गए हैं। नाबार्ड की 31 मार्च 2024 की ताज़ा रिपोर्ट में गंभीर चिंताएं जताई गई थीं, जिन पर बोर्ड ने कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की। इससे बैंक की साख और जमाकर्ताओं की पूंजी को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

बैंक पर प्रमुख आरोप:

  • वित्तीय गिरावट : 767.45 करोड़ की परिसंपत्तियों का क्षरण और 11.34 करोड़ के लाभ में कमी।

  • एनपीए में वृद्धि : सकल एनपीए 23.45% और शुद्ध एनपीए 8.81%, जो सहनशील सीमा (5%) से बहुत अधिक।

  • अनधिकृत ऋण वितरण : अधिसूचित क्षेत्र से बाहर 1090 ऋण स्वीकृत, जिनमें से 80% एनपीए बने।

  • अनुपालन में चूक : आरबीआई और नाबार्ड के दिशा-निर्देशों की अनदेखी, केवाईसी व एएमएल में गंभीर कमियां।

  • धोखाधड़ी : 20.99 करोड़ के 241 धोखाधड़ी मामले लंबित, कई रिपोर्ट ही नहीं की गईं।

  • प्रबंधन की खामियां : आरबीआई-एनपीसीआई के जुर्माने, सेवाओं में बाधा और स्टाफ निर्णयों में गड़बड़ी।

राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि बैंक का प्रबंधन अब पारदर्शिता और कानून के तहत ही चलेगा। जनता और जमाकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।