➤ शिमला में भाकपा (माक्र्सवादी) का जोरदार प्रदर्शन, सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ नारेबाजी
➤ गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना
➤ लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और सोनम वांगचुक की रिहाई की उठी मांग
शिमला में शनिवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जिला कमेटी शिमला ने लद्दाख के पर्यावरणविद और समाजसेवी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी के जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, जगमोहन ठाकुर, बालक राम और अनिल ठाकुर ने सभा को संबोधित किया और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए।
नेताओं ने कहा कि सोनम वांगचुक लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के अग्रणी नेता रहे हैं। लेकिन सरकार ने उनके आंदोलन को कुचलने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसे कठोर प्रावधानों का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न केवल तानाशाही रवैये को उजागर करती है, बल्कि लद्दाख के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों और आकांक्षाओं का अपमान भी है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लद्दाख के लोगों की वर्षों से चली आ रही मांगों को अनसुना कर सरकार केवल दमनकारी कदम उठा रही है। इस दौरान आंदोलन पर हुए हमलों से चार लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं, जिसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया।
प्रदर्शनकारियों ने सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने, लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी और सबसे महत्वपूर्ण लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार की हठधर्मिता और दमनकारी नीतियां न केवल लद्दाख बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर और हिमालयी क्षेत्र में असंतोष और अलगाव की भावना को बढ़ा रही हैं।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार अब भी सार्थक बातचीत करने से बचती रही तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।



