➤ शिमला के जाखू मंदिर में धूमधाम से मनाया गया दशहरा उत्सव
➤ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रिमोट से किया रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन
➤ हजारों लोगों की भीड़ ने देखा राम-रावण युद्ध और पुतला दहन का भव्य नजारा
शिमला। विजयदशमी का पर्व इस बार भी राजधानी शिमला के जाखू मंदिर परिसर में पूरे उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। भगवान हनुमान की दिव्य उपस्थिति में आयोजित इस दशहरा उत्सव का आकर्षण रहा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, जिन्होंने रिमोट का बटन दबाकर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया। इस दौरान मंदिर प्रांगण और आस-पास के क्षेत्रों में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना से हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री दशहरा स्थल पर पहुंचे। वहां नाभा रामलीला मंडली ने राम-रावण युद्ध का मंचन कर समूचे वातावरण को भक्तिमय और ऐतिहासिक बना दिया। इसके बाद जब मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर पुतलों को दहन किया तो आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा और “जय श्रीराम” के नारों से जाखू गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि दशहरा पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें अच्छाई को अपनाने और बुराई का त्याग करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों को दशहरा की शुभकामनाएं दीं और सामूहिक उत्सव की परंपरा को समाजिक एकजुटता का प्रतीक बताया।

शिमला के जाखू मंदिर का दशहरा हर साल खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यहां भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची प्रतिमा की छत्रछाया में पुतला दहन होता है। पर्व का यह स्वरूप स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है।



