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दो महीने से पेंशन न मिलने पर HRTC पेंशनर्स भड़के, 15 अक्टूबर को करेंगे शिमला में विशाल धरना

➤ HRTC के पेंशनरों को दो महीने से नहीं मिली पेंशन, 15 अक्टूबर को शिमला में धरना
➤ सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल, 8 हजार से अधिक पेंशनर करेंगे प्रदर्शन
➤ अन्य विभागों के पेंशनर भी 17 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी में


हिमाचल प्रदेश सरकार की कमजोर वित्तीय स्थिति अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों के गुस्से का कारण बन रही है। एचआरटीसी (HRTC) के पेंशनरों को दो महीने (अगस्त और सितंबर) से पेंशन नहीं मिली है, जिससे बुजुर्ग पेंशनर्स में भारी नाराजगी और आक्रोश फैल गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि 15 अक्टूबर को शिमला स्थित एचआरटीसी निगम मुख्यालय के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन में निगम के 8 हजार से अधिक पेंशनर्स अपने परिवार सहित भाग लेंगे।

एचआरटीसी पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के सचिव राजेन्द्र ठाकुर ने कहा कि लगातार दो महीने से पेंशन न मिलने से सेवानिवृत्त कर्मचारी वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग पेंशनर्स बच्चों पर निर्भर होने को मजबूर हैं, जो उम्र के इस पड़ाव में बेहद अपमानजनक और दुखद स्थिति है।

राजेन्द्र ठाकुर ने बताया कि पिछले दो वर्षों से पेंशनर्स अपनी लंबित मांगों को लेकर अधिकारियों और मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी पेंशनर्स को राज्य के अन्य पेंशनर्स के समान लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो इसका खामियाजा उसे आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा

उन्होंने कहा कि मार्च 2024 के बाद सेवानिवृत्त हुए कई पेंशनरों को अब तक पेंशन शुरू भी नहीं हुई है, जिससे कई परिवारों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है।

इसी बीच, हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने कहा कि एचआरटीसी के अलावा अन्य विभागों के पेंशनरों के लंबित डीए, एरियर और मेडिकल बिलों का भुगतान भी महीनों से अटका हुआ है।
उन्होंने कहा कि समिति ने 17 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। पेंशनरों ने सचिवालय घेराव की चेतावनी दी है और साफ कहा है कि यदि सरकार ने 14 सूत्रीय मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और भी तेज और व्यापक होगा।

पेंशनर्स का कहना है कि अब संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की चुप्पी अस्वीकार्य है। उनका दावा है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन प्रदेश में सरकार की साख पर गहरा असर डाल सकता है।