➤ हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स की मांगों पर सरकार की अनदेखी, संघर्ष समिति ने बुलाई आपात बैठक
➤ 7 नवंबर को मंडी में तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति, सरकार पर गंभीर आरोप
➤ संघर्ष समिति बोली— सरकार पेंशनरों की एकता को कम न आंके, जल्द करे वार्ता
मंडी। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स सयुंक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार पर पेंशनरों की मांगों को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया है। समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, महासचिव ईद्रपाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि प्रदेश सरकार जानबूझकर पेंशनरों की देनदारियों को रोक रही है और वित्तीय संकट का बहाना बनाकर टालमटोल कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 6ठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार 1 जनवरी 2016 से देय करोड़ों रुपये अभी तक सरकार ने जारी नहीं किए हैं। 17 अक्टूबर 2025 को पेंशनर्स ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से न तो कोई मांग मानी गई है और न ही वार्ता का निमंत्रण मिला है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
इस स्थिति को देखते हुए पेंशनर्स सयुंक्त संघर्ष समिति ने 7 नवंबर 2025 को मंडी में आपातकालीन बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह बैठक समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में विश्वकर्मा सभा हाल (पुराना सुकेत पुल के पास) में सुबह 10:30 बजे आयोजित की जाएगी। बैठक में 18 विभिन्न संगठनों के लगभग 200 पदाधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों की समीक्षा की जाएगी और दूसरे चरण के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश स्तरीय आंदोलन इसी महीने से शुरू किया जाएगा, जिसकी तारीख और रूपरेखा बैठक के बाद प्रेस वार्ता के माध्यम से घोषित की जाएगी।
समिति ने चेतावनी दी है कि “अभी नहीं तो कभी नहीं” के नारे के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा और यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो सरकार को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। समिति ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह पेंशनरों की एकता को कम न आंके और कुछ तथाकथित नेताओं की चमचागिरी में न फंसे, बल्कि संघर्ष समिति को वार्ता के लिए बुलाकर समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाले, ताकि पेंशनरों में बढ़ता असंतोष समाप्त हो सके।



