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मंत्रियों के दैनिक भत्ते 1,800 से बढ़ाकर 2,500 रुपये

➤ राज्यपाल की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी
➤ बढ़ती महंगाई और दौरा-व्यय को आधार मानकर लिया गया फैसला


राज्य सरकार ने मंत्रियों को मिलने वाले दैनिक भत्तों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करते हुए इसे 1,800 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिदिन कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मंत्रियों को उनके आधिकारिक दौरों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान होने वाले खर्चों को पूरा करने में सहूलियत देना है। सरकार का मानना है कि राज्य के विभिन्न जिलों में योजना निरीक्षण, सार्वजनिक कार्यक्रमों में भागीदारी, आपदा आकलन और प्रशासनिक कार्यों के लिए मंत्रियों का लगातार दौरा अनिवार्य होता है, जिसके लिए उपयुक्त वित्तीय प्रावधान आवश्यक है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्यपाल की मंजूरी के बाद इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके साथ ही यह संशोधन औपचारिक रूप से लागू हो गया है। अधिसूचना के अनुसार, यह बढ़ा हुआ भत्ता उन्हीं परिस्थितियों में देय होगा, जब मंत्री राज्य मुख्यालय से बाहर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हों। सरकार का तर्क है कि यात्रा, भोजन, आवास और अन्य आवश्यक खर्चों में आई वृद्धि को देखते हुए यह संशोधन न्यायोचित है।

यह बदलाव विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पारित किए गए उस संशोधन विधेयक का हिस्सा है, जिसमें मंत्रियों, विधायकों और पेंशनधारकों से जुड़े वेतन एवं भत्तों की समीक्षा की गई थी। विधेयक में न केवल भत्ते बढ़ाने का प्रावधान शामिल था, बल्कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप पूरी भत्ता-व्यवस्था को अद्यतन करने पर भी जोर दिया गया था। सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में महंगाई और यात्रा-व्यय में बढ़ोतरी के चलते यह संशोधन आवश्यक था।

भत्तों की यह बढ़ोतरी जहां प्रशासनिक दृष्टि से तर्कसंगत मानी जा रही है, वहीं कुछ वर्गों में इस पर चर्चा भी स्वाभाविक रूप से शुरू हो गई है, क्योंकि जनप्रतिनिधियों के वेतन या भत्तों में बढ़ोतरी अक्सर राजनीतिक विमर्श का विषय बनती रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी सीमित और केवल आवश्यक खर्चों की पूर्ति तक ही सीमित है।

कुल मिलाकर, यह निर्णय सरकार द्वारा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यावहारिक और समसामयिक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि उचित भत्ते मिलने से मंत्री अपने दायित्वों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा पाएंगे, जिससे विकास संबंधित कार्य और सार्वजनिक मामलों का निस्तारण और अधिक सुचारू ढंग से हो सकेगा।