➤ फर्जी EWS प्रमाणपत्र से नौकरी लेने पर आयुर्वेदिक डॉक्टर गिरफ्तार
➤ कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, जमानत याचिका पहले ही खारिज
➤ अन्य डॉक्टरों व प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने के संकेत
हिमाचल प्रदेश में फर्जी EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र के जरिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की नौकरी हासिल करने का मामला सामने आने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, मंडी ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
विजिलेंस की जांच तेज होने के बीच एक आरोपी डॉक्टर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद विजिलेंस ने डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेशी के बाद आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले राजस्व अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि लोक मित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन के बाद बिना उचित सत्यापन के EWS प्रमाणपत्र जारी किए गए। जबकि सरकारी नीति के अनुसार गहन जांच के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाना चाहिए था।
विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र किस प्रक्रिया से और किनकी मिलीभगत से जारी हुए। यदि जांच में ठोस सबूत सामने आते हैं तो और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
मंडी जिले से जुड़े चार आयुर्वेदिक डॉक्टरों के EWS प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए थे, जिनमें से एक की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बाकी पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।
बताया जा रहा है कि कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र की एक महिला की शिकायत के बाद यह मामला उजागर हुआ था। जांच के दौरान टिहरा, छतरी, चुराग और हीरानगर से जुड़े चार उम्मीदवारों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जिस पर IPC की धाराएं 420, 465, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है।



