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तापमान में उतार-चढ़ाव, जानें IMD का पूर्वानुमान

विंटर सीजन में हिमाचल में 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज
22 फरवरी तक साफ मौसम, बारिश-बर्फबारी के आसार नहीं
कम बर्फबारी से किसान और बागवानों की चिंता बढ़ी


हिमाचल प्रदेश में इस बार का विंटर सीजन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। बारिश और बर्फबारी में आई कमी ने न केवल मौसम का मिजाज बदला है, बल्कि किसानों और बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 18 फरवरी के बीच सामान्य तौर पर 145.3 मिलीमीटर वर्षा होती है, जबकि इस वर्ष केवल 101.9 मिलीमीटर ही बारिश दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

आईएमडी के मुताबिक आगामी चार दिनों तक भी बारिश और बर्फबारी के आसार नहीं हैं। 22 फरवरी तक प्रदेश में साफ और धूप खिलने का पूर्वानुमान है। लगातार साफ मौसम के कारण तापमान में उछाल आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बीते 24 घंटों में अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस कम रहा।

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सोलन में सबसे ज्यादा 8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और अधिकतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। सुंदरनगर में 6.2 डिग्री गिरावट के बाद तापमान 19.3 डिग्री रहा। शिमला में 5.1 डिग्री की कमी के साथ अधिकतम तापमान 13.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मनाली में 3.6 डिग्री गिरकर 12.4 डिग्री और मंडी में 3.9 डिग्री की गिरावट के बाद 19.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया।

कम वर्षा और बर्फबारी का असर सबसे अधिक कृषि और बागवानी क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। विशेषकर सेब उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त बर्फ न गिरना चिंता का विषय बन गया है। बर्फबारी से जमीन को प्राकृतिक नमी मिलती है, जो गर्मियों में जलस्रोतों और फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि यही स्थिति बनी रही तो गर्मियों में जल संकट और उत्पादन में गिरावट का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि मौसम विभाग ने 23 फरवरी को एक नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होने की संभावना जताई है। इसके प्रभाव से ऊंचे और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। फिलहाल प्रदेशवासियों को कुछ दिन और शुष्क और साफ मौसम का सामना करना पड़ेगा।