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देश में सभी जिलों में गणना करवाने वाला बना पहला राज्य, 357 पक्षी प्रजातियां दर्ज

हिमाचल में GBBC 2026 के दौरान 357 पक्षी प्रजातियां दर्ज
देश में सभी जिलों में गणना करवाने वाला बना पहला राज्य
कांगड़ा में सर्वाधिक 257 प्रजातियां, पूरे भारत में 8वां स्थान


हिमाचल प्रदेश ने पक्षी संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष आयोजित ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (GBBC) 2026 के दौरान प्रदेश में कुल 357 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। विशेष बात यह रही कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सभी 12 जिलों में एक साथ पक्षी गणना करवाई गई।

यह अंतरराष्ट्रीय वार्षिक कार्यक्रम हर वर्ष फरवरी में आयोजित किया जाता है। इस बार 13 फरवरी से 16 फरवरी तक विश्वभर में गणना की गई। हिमाचल प्रदेश में यह कार्यक्रम वन विभाग हिमाचल प्रदेश, eBird India और Bird Count India के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

गणना में 180 से अधिक वन अधिकारियों, जीवविज्ञानियों, पक्षी विशेषज्ञों, पक्षी प्रेमियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में 322, 2025 में 326 और 2026 में 357 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इस निरंतर बढ़ोतरी ने प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित किया है।

पूरे भारत में GBBC 2026 के दौरान 1090 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिसमें हिमाचल प्रदेश को 8वां स्थान प्राप्त हुआ। वहीं, eBird प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक प्रदेश में कुल 640 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है।

जिलावार आंकड़ों में कांगड़ा जिला 257 प्रजातियों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि सिरमौर में 192, चंबा में 142, मंडी में 130, सोलन में 128, हमीरपुर में 95, शिमला में 93, कुल्लू में 92, बिलासपुर में 82, ऊना में 70, किन्नौर में 54 और लाहौल-स्पीति में 38 प्रजातियां दर्ज की गईं।

अरण्यपाल वन्यप्राणी वृत शिमला दक्षिण प्रीति भंडारी (IFS) ने कार्यक्रम से जुड़े सभी समन्वयकों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे अभियानों को सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि पक्षियों की गणना न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आम लोगों में संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।