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कांगड़ा में ATS के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से सब बेहाल- प्राइवेट बसें बंद, जनता परेशान

कांगड़ा में ATS के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

प्राइवेट बसों और ट्रकों के पहिए थमे, स्कूलों में छुट्टी, जनता परेशान

मांगें न मानी गईं तो प्रदेशव्यापी चक्का जाम की चेतावनी


हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते जिले में प्राइवेट बसों, ट्रकों और अन्य वाणिज्यिक वाहनों के पहिए थम गए, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से ही लोग विभिन्न बस स्टॉप और प्रमुख चौकों पर घंटों बसों का इंतजार करते नजर आए।

इस हड़ताल का असर केवल परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले के कई निजी स्कूलों को भी छुट्टी घोषित करनी पड़ी। स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण यह फैसला लिया। वहीं धर्मशाला पहुंचे देशी-विदेशी पर्यटकों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई पर्यटक समय पर एयरपोर्ट और होटल तक नहीं पहुंच सके, जिससे स्थानीय पर्यटन गतिविधियों पर भी असर देखा गया।

धर्मशाला में कमर्शियल व्हीकल ऑपरेटर संघर्ष समिति ने प्रदर्शन और चक्का जाम के बाद बैठक की। समिति के अध्यक्ष कार्तिक शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शाम तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन चक्का जाम में बदल दिया जाएगा। समिति के अन्य पदाधिकारियों रवि दत्त, मंजीत सिंह, देशराज और देशराज सिंह ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों का आर्थिक शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ट्रांसपोर्ट यूनियनों की मुख्य मांग है कि वाहनों की पासिंग की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए, जिसमें मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर सीधे निरीक्षण कर पासिंग करते थे। जिला ट्रक यूनियन के प्रधान महेंद्र चौहान ने कहा कि ATS पर यदि वाहन में कोई तकनीकी कमी बताई जाती है, तो ड्राइवरों और मालिकों को बार-बार स्टेशन के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि नई ऑटोमेटेड प्रणाली में व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं। पहाड़ी इलाकों में चलने वाले वाहनों की स्थिति मैदानी इलाकों से अलग होती है, लेकिन ATS में एक समान मानक लागू किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय ऑपरेटरों को परेशानी हो रही है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत वाहनों की फिटनेस और पासिंग के लिए राज्य में अलग-अलग स्थानों पर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। अब व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच इन्हीं स्टेशनों के माध्यम से की जा रही है।

इधर एडीएम कांगड़ा शिल्पी बेक्टा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर जिले की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला दिया है। साथ ही राज्य सरकार को भी ट्रांसपोर्टरों की मांगों से अवगत कराया गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल सकता है।