Follow Us:

हिमाचल में बनीं 45 समेत देशभर की 159 दवाओं के सैंपल फेल, बाजार से स्टॉक वापस मंगवाया

हिमाचल में बनीं 45 समेत देशभर की 159 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल
सीडीएससीओ ने ड्रग अलर्ट जारी कर बाजार से स्टॉक वापस मंगवाया
एलर्जी, बुखार, हार्ट, खांसी और बच्चों की दवाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं


हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी जून माह के ड्रग अलर्ट में खुलासा हुआ है कि देशभर की 159 दवाओं के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 45 दवाएं भी शामिल हैं। इसके बाद संबंधित दवाओं का स्टॉक बाजार से वापस मंगाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

ड्रग अलर्ट के अनुसार बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित विभिन्न दवा निर्माण इकाइयों की कई दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इनमें एलर्जी, संक्रमण, हार्ट, बुखार, दर्द, खांसी, अल्सर और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।

जांच में सामने आया कि कई दवाएं डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय तत्व (API) की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों में असफल पाई गईं। विशेषज्ञों के अनुसार इन मानकों में कमी मरीजों के उपचार की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है।

झाड़माजरी स्थित एक फार्मा कंपनी की एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलनेट टैबलेट तथा सेफिक्सिम डिस्पर्सिबल टैबलेट गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई हैं। इसके अलावा पशुओं में उपयोग होने वाला लिवग्रो इंजेक्शन भी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि पैरासिटामोल पीडियाट्रिक सस्पेंशन के दो बैच भी गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए हैं। यह दवा बच्चों में बुखार और दर्द के इलाज के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा एम्ब्रोक्सोल-टरब्यूटालिन-गुआइफेनेसिन सिरप, प्रोमेथाजिन सिरप, फिनाइलएफ्रिन-क्लोरफेनिरामिन सिरप तथा मोंटेलुकास्ट-लेवोसेटिरिजिन जैसी दवाएं भी कंटेंट संबंधी परीक्षण में फेल हुई हैं।

राज्य ड्रग नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि जिन कंपनियों की दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई हैं, उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभाग अपने स्तर पर भी संबंधित दवाओं के नमूनों की दोबारा जांच करेगा।

ड्रग अलर्ट जारी होने के बाद संबंधित दवा कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार में उपलब्ध संबंधित बैचों का स्टॉक तत्काल वापस मंगाएं, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।