➤ दिल्ली हाईकोर्ट ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए बनाई फास्ट ट्रैक कोर्ट
➤ जस्टिस अनु ग्रोवर बलिगा को स्पेशल जज नियुक्त, राऊज एवेन्यू कोर्ट से होगी सुनवाई
➤ पब्लिक एग्जाम्स एक्ट-2024 के तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक जुर्माना संभव
नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल (अनुचित साधनों के इस्तेमाल) से जुड़े मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने ऐसे आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी है। इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस अनु ग्रोवर बलिगा को इस फास्ट ट्रैक कोर्ट का स्पेशल जज नियुक्त किया है। यह विशेष अदालत राऊज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स से संचालित होगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल तथा अन्य अनुचित साधनों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी।
क्या होती है फास्ट ट्रैक कोर्ट?
फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐसी विशेष अदालत होती है, जहां सामान्य अदालतों की तुलना में मामलों की सुनवाई अधिक तेजी से की जाती है। इन अदालतों का उद्देश्य लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करना होता है। देश में यौन अपराध, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर मामलों की सुनवाई भी अक्सर फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाती है ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। अब इसी तर्ज पर पेपर लीक और परीक्षा कदाचार से जुड़े मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा।
2024 में बना था सख्त कानून
केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में पब्लिक एग्जाम्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) एक्ट, 2024 लागू किया था। इस कानून के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी को गंभीर अपराध माना गया है। कानून में 10 साल तक की सजा और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन से इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने दिया था सख्त कार्रवाई का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इस समस्या पर सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार ठोस फैसले ले रही है और फास्ट ट्रैक व्यवस्था उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह घोषणा ऐसे समय सामने आई थी जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों छात्रों ने ‘संसद चलो’ मार्च निकाला था और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।



