➤ नीट पेपर लीक विवाद के बाद NTA के 47 अधिकारियों को किया गया बर्खास्त
➤ कुछ अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी, परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार के संकेत
➤ परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लागू होंगे व्यापक बदलाव
नई दिल्ली। 2026 नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। सूत्रों के अनुसार इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में छात्रों का विश्वास दोबारा स्थापित करना और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है।
जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय में तबादला किया गया है। सरकार अब NTA की पूरी कार्यप्रणाली की समीक्षा कर उसे नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी का कायाकल्प किया जाएगा और सुधारात्मक कदम चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे।
परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े बदलाव
सरकारी सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में NTA की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं। परीक्षा संचालन में निजी एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की भूमिका की समीक्षा होगी तथा आउटसोर्सिंग व्यवस्था के नियम पहले से अधिक सख्त किए जाएंगे।
इसके साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित पैकेजिंग और वितरण व्यवस्था, उन्नत तकनीकी निगरानी तथा परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। परीक्षा प्रक्रिया की नियमित समीक्षा और निगरानी के लिए भी नई प्रणाली विकसित करने की तैयारी है।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें होंगी लागू
सरकार विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है। परीक्षा केंद्रों के चयन, उनकी निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और वितरण प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। साथ ही NTA की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए प्रावधान लागू किए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना न्यूनतम रहे।
क्यों उठी सुधार की जरूरत?
पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) लगातार विवादों के केंद्र में रही है। विशेष रूप से 2026 नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे। देशभर के छात्रों ने पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर आंदोलन किए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों ने लगातार प्रदर्शन कर जिम्मेदारी तय करने और व्यापक सुधार की मांग उठाई।
छात्रों के आंदोलन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी काफी गर्माया। विपक्ष ने संसद में इस मामले पर चर्चा और शिक्षा मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की।
CBSE और NEET विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
पिछले दो महीनों में शिक्षा मंत्रालय लगातार विवादों में रहा। पहले CBSE की कक्षा 12 ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर सवाल उठे और उसके बाद नीट पेपर लीक विवाद ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए।
नीट-यूजी को लेकर छात्रों का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है। छात्र प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
2024 में भी हुई थी कार्रवाई
यह पहला अवसर नहीं है जब NTA पर बड़ी कार्रवाई हुई हो। इससे पहले 2024 में नीट और यूजीसी-नेट पेपर लीक विवाद के बाद तत्कालीन महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को पद से हटाया गया था। बाद में उन्हें इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया और फिर उनके मूल कैडर छत्तीसगढ़ भेज दिया गया।
सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कठोर प्रशासनिक कार्रवाई और तकनीकी सुधार दोनों आवश्यक हैं।



