➤ चंबा में फ्लैश फ्लड से घरों, दुकानों और वाहनों को भारी नुकसान
➤ पठानकोट-भरमौर नेशनल हाईवे समेत 100 से अधिक सड़कें बंद
➤ सरोल, घोल्टी और सुल्तानपुर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
चंबा जिले में सोमवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। लगातार हुई तेज बारिश के बाद कई क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड जैसे हालात बन गए, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। शहर के सरोल, घोल्टी, सुल्तानपुर और ओवरडी मोहल्ले सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां बारिश का पानी और मलबा घरों, दुकानों और सड़कों में घुस गया।

बारिश के बाद आए तेज बहाव ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी। कई परिवारों को रात में ही अपने घरों से बाहर निकलना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ ही मिनटों में नालों का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया और पानी अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच गया।

सरोल-घोल्टी क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है। यहां कई मकानों और दुकानों में पानी व मलबा घुसने से लाखों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। कई दुकानों में रखा सामान खराब हो गया, जबकि घरों में फर्नीचर और घरेलू सामान मलबे में दब गया।

बारिश का असर केवल रिहायशी इलाकों तक ही सीमित नहीं रहा। तेज बहाव की चपेट में आने से 10 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ वाहन मलबे में दब गए, जबकि कुछ को पानी अपने साथ बहाकर ले गया। कई वाहन मालिक सुबह उठकर अपने वाहनों को खोजते नजर आए।

सुल्तानपुर मोहल्ले में भी हालात बेहद खराब रहे। यहां कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं चंबा डिग्री कॉलेज परिसर भी पानी और मलबे से भर गया, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जिले में यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित करीब 100 सड़कें बंद होने की सूचना है। कई स्थानों पर पहाड़ियों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण सड़क संपर्क टूट गया है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें मार्ग बहाल करने में जुटी हुई हैं।

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। राहत एवं बचाव दलों को भी अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

चंबा में आई इस आपदा ने एक बार फिर मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग प्रशासन से नालों की सफाई, सुरक्षा दीवारों के निर्माण और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।



