➤ अति निर्धन परिवारों के चयन के लिए दो चरणों में होगी पात्रता जांच
➤ 75 हजार रुपये से अधिक आय, एक हेक्टेयर से ज्यादा जमीन या नौकरी होने पर लाभ नहीं
➤ चयन में लापरवाही पर बीडीओ और एसडीएम के खिलाफ होगी कार्रवाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत अति निर्धन परिवारों की पहचान और चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है। योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने लाभार्थियों के चयन के लिए दोहरी कसौटी निर्धारित की है।
इसके तहत परिवारों की पहले समावेशन मानदंड के आधार पर प्रारंभिक पात्रता तय की जाएगी। इसके बाद बहिष्करण की चार शर्तों के आधार पर अंतिम जांच होगी। इस प्रक्रिया के बाद ही यह तय किया जाएगा कि कौन सा परिवार योजना का वास्तविक लाभार्थी होगा।
विधानसभा में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधायकों को योजना के तहत निर्धारित चयन मानदंडों की जानकारी दी। सरकार का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे कमजोर परिवारों को प्राथमिकता देते हुए सहायता को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना है।
75 हजार रुपये से अधिक आय होने पर नहीं मिलेगा लाभ
योजना के तहत 75 हजार रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार अंतिम रूप से पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा यदि परिवार के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है, परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता है या कोई सदस्य सरकारी, अर्धसरकारी अथवा निजी नौकरी में है, तो परिवार को अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा।
इस तरह प्रारंभिक पात्रता में आने के बावजूद परिवार को अंतिम चयन से पहले इन सभी शर्तों की जांच से गुजरना होगा।
अनाथ बच्चों वाले परिवारों को प्राथमिकता
सरकार ने समावेशन प्रक्रिया में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी है। 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवारों को पात्र परिवारों के प्रारंभिक पूल में शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा ऐसे परिवार भी प्रारंभिक पात्रता के दायरे में आएंगे, जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं और परिवार में 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है।
महिला मुखिया और दिव्यांग मुखिया वाले परिवार भी दायरे में
सरकार ने ऐसे परिवारों को भी प्राथमिकता दी है, जिनकी महिला मुखिया है और जिनमें 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है। इसमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल हैं।
वहीं 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवारों को भी प्रारंभिक पात्र परिवारों के पूल में शामिल किया जाएगा।
मनरेगा में काम करने वाले परिवारों को भी प्रारंभिक पात्रता
जिन परिवारों के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, उन्हें भी प्रारंभिक पात्रता मिलेगी।
इसके साथ ही गंभीर बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम कमाने वाले सदस्य वाले परिवारों को भी योजना के दायरे में रखा गया है। इनमें कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवार शामिल हैं।
दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण स्थायी रूप से बिस्तर पर पड़े कमाने वाले सदस्य वाले परिवारों को भी प्रारंभिक पात्रता सूची में शामिल किया जाएगा।
चार शर्तों के आधार पर होगी अंतिम छंटनी
सरकार द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार प्रारंभिक पात्रता के बाद परिवार की अंतिम जांच की जाएगी। इस चरण में चार बहिष्करण मानदंड में से कोई भी शर्त पूरी होने पर परिवार को योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
सरकार ने इसे एक उदाहरण से भी स्पष्ट किया है। यदि किसी परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, तो वह प्रारंभिक पात्रता सूची में शामिल हो सकता है।
लेकिन अंतिम जांच में यदि उस परिवार की वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक पाई जाती है, तो उसे योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
वहीं यदि परिवार की वार्षिक आय 75 हजार रुपये या उससे कम है, उसके पास एक हेक्टेयर या उससे कम जमीन है और परिवार में कोई आयकरदाता या नौकरी करने वाला सदस्य नहीं है, तो उसे अंतिम रूप से योजना का पात्र माना जाएगा।
चयन में लापरवाही पर बीडीओ और एसडीएम पर कार्रवाई
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि अति निर्धन परिवारों के चयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि पात्र परिवारों के चयन में लापरवाही सामने आती है तो खंड विकास अधिकारी और उपमंडलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मंत्री ने बताया कि पात्र परिवारों के चयन के लिए समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों के माध्यम से पात्रता की जांच कर परिवारों की सूची तैयार की जा रही है।
सरकार ने अधिकारियों को चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति को सूची में शामिल किया गया या किसी पात्र परिवार को जानबूझकर बाहर रखा गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
30 अगस्त तक सरकार को देनी होगी पूरी सूची
सरकार ने सभी जिलाधीशों को निर्देश जारी किए हैं कि वे पात्र परिवारों की सूची की समीक्षा कर 30 अगस्त तक पूरी सूची सरकार को उपलब्ध करवाएं।
इस बीच भाजपा विधायक जीतराम कटवाल ने भी वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना की सूची में शामिल करने और सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई पात्र परिवार आय प्रमाणपत्र सहित अन्य औपचारिकताओं के कारण योजना के लाभ से वंचित रह रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग अपना नाम सूची में शामिल करवाने में सफल हो रहे हैं।
विधायक ने बताया कि उनके क्षेत्र में पिछले सर्वे में करीब 150 परिवार पात्र पाए गए थे, जबकि नए सर्वे में यह संख्या घटकर महज 30 से 40 परिवार रह गई है। उन्होंने सरकार से इस अंतर की जांच करवाने और सर्वे में छूटे पात्र परिवारों को योजना की सूची में शामिल करने की मांग की।
सरकार की नई चयन प्रक्रिया का उद्देश्य यही है कि मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना का लाभ वास्तविक रूप से अति निर्धन और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे तथा अपात्र लोगों को सरकारी सहायता का लाभ न मिल सके।



