➤ हिमाचल के करीब दो लाख गरीब परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और महिलाओं को 1500 रुपये मिलेंगे
➤ 2 अक्तूबर से सोलन में शुरू होगी मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना, 90 हजार परिवारों की पहचान पूरी
➤ 75 हजार से अधिक सालाना आय, एक हेक्टेयर से ज्यादा जमीन और नौकरी वाले परिवार होंगे योजना से बाहर
हिमाचल प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राज्य सरकार एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना लागू करने की तैयारी पूरी कर रही है। करीब दो लाख परिवारों को 300 यूनिट तक निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने के साथ पात्र परिवारों की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पात्र परिवारों की पहचान का सर्वेक्षण लगभग पूरा कर लिया गया है।
सरकार इस योजना को मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को कांगड़ा जिले के डाडासीबा में योजना को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस वर्ष 2 अक्तूबर को सोलन जिले से योजना शुरू करेगी।
इस योजना के तहत सरकार का फोकस उन परिवारों पर है, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हैं तथा अभी तक किसी सरकारी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं उठा पाए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार ऐसे करीब 90 हजार परिवारों की पहचान की गई है, जिन्हें अब तक किसी सरकारी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। हालांकि योजना का कुल लाभ करीब दो लाख परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये, बिजली बिल में भी राहत
मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत पात्र परिवारों को दोहरी राहत देने की तैयारी है। चयनित परिवारों की महिला मुखिया या पात्र महिला सदस्य के बैंक खाते में हर महीने 1500 रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी।
इसके साथ ही परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मासिक खर्च में सीधी कमी आने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि बिजली बिल में राहत और महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिलने से कमजोर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। विशेषकर महिला मुखिया वाले परिवारों के लिए यह सहायता सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
2 अक्तूबर को सोलन से हो सकता है शुभारंभ
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने डाडासीबा में कहा कि योजना का शुभारंभ 2 अक्तूबर को सोलन जिले से किया जाएगा। इसे सरकार की महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किया जा रहा है।
इस बीच चर्चा है कि योजना का औपचारिक शुभारंभ कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी के हाथों कराया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी स्तर पर इसे बड़े राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
यदि प्रियंका गांधी कार्यक्रम में शामिल होती हैं तो योजना का शुभारंभ राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
कांग्रेस की दो चुनावी गारंटियों को एक योजना में जोड़ा
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और नीतिगत विशेषता यह है कि इसमें कांग्रेस की वर्ष 2022 की विधानसभा चुनावी घोषणाओं से जुड़ी दो प्रमुख गारंटियों को एकीकृत करने की कोशिश की गई है।
कांग्रेस ने चुनाव के दौरान प्रदेश की महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने और परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। सरकार अब दोनों घोषणाओं को एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना के माध्यम से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विपक्ष इन दोनों चुनावी गारंटियों के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में दोनों वादों को एक योजना के तहत लागू करने की तैयारी को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
सरकार का तर्क है कि अलग-अलग विभागों के माध्यम से योजनाओं का लाभ देने के बजाय पात्र परिवारों को एकीकृत तरीके से सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसी सोच के आधार पर योजना को व्यापक स्वरूप दिया गया है।
किन परिवारों को नहीं मिलेगा लाभ
सरकार ने योजना के लिए सामाजिक और आर्थिक पात्रता के मानदंड भी तय किए हैं। 75 हजार रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।
इसके अलावा जिस परिवार के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है, उसे भी पात्रता सूची से बाहर रखा जाएगा। परिवार में कोई सदस्य आयकरदाता है या सरकारी, अर्धसरकारी अथवा निजी नौकरी में कार्यरत है, तो ऐसे परिवार को भी अंतिम सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता वास्तव में उन परिवारों तक पहुंचे, जिन्हें आर्थिक मदद की सबसे अधिक जरूरत है।
महिला मुखिया वाले परिवारों को प्राथमिकता
योजना की पात्रता में महिला मुखिया वाले परिवारों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। ऐसे परिवार, जिनमें 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है और परिवार की जिम्मेदारी महिला के पास है, पात्रता के दायरे में आ सकते हैं।
इनमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल हैं। ऐसे परिवारों को आर्थिक रूप से अधिक संवेदनशील मानते हुए पात्रता पूल में स्थान दिया गया है।
इसके अलावा 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवारों को भी पात्र परिवारों के पूल में शामिल किया जाएगा।
अनाथ बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवार भी दायरे में
योजना के तहत 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवारों को भी पात्रता पूल में शामिल किया जाएगा। इसी तरह ऐसे परिवार जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं और 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है, उन्हें भी पात्रता के दायरे में रखा गया है।
इन प्रावधानों के पीछे सरकार का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना है, जिनके पास नियमित कमाने वाला वयस्क सदस्य नहीं है।
ऐसे परिवारों के लिए नियमित आर्थिक सहायता और बिजली बिल में राहत घरेलू खर्च संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मनरेगा में काम करने वाले परिवार भी पात्र
योजना की पात्रता में मनरेगा से जुड़े परिवारों को भी स्थान दिया गया है। जिन परिवारों के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, उन्हें भी प्रारंभिक पात्रता मिल सकती है।
इस मानदंड के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर और श्रम आधारित आय पर निर्भर परिवारों को योजना में शामिल करने का प्रयास किया गया है।
इससे यह संकेत मिलता है कि योजना की पात्रता केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जा रही है।
गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवारों को भी राहत
सरकार ने गंभीर बीमारी से प्रभावित परिवारों के लिए भी पात्रता का प्रावधान रखा है। कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से स्थायी रूप से अक्षम कमाने वाले सदस्य वाले परिवारों को भी पात्रता के दायरे में शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण स्थायी रूप से बिस्तर पर पड़े कमाने वाले सदस्य वाले परिवारों को भी पात्र पूल में शामिल करने का प्रावधान है।
ऐसे परिवारों में बीमारी या दुर्घटना के कारण कमाई का प्रमुख साधन प्रभावित हो जाता है। ऐसे में नियमित आर्थिक सहायता और मुफ्त बिजली जैसी सुविधा उनके घरेलू खर्च का बोझ कम कर सकती है।
सर्वेक्षण लगभग पूरा, अब अंतिम सूची पर नजर
ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पात्र परिवारों की पहचान के लिए किया जा रहा सर्वेक्षण लगभग पूरा हो चुका है। सर्वेक्षण के आधार पर सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को चिन्हित किया जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और अपात्र परिवार सरकारी सहायता का लाभ न उठा सकें। इसके लिए आय, भूमि, रोजगार, परिवार की सामाजिक स्थिति और अन्य निर्धारित मानदंडों को आधार बनाया जा रहा है।
अब योजना के औपचारिक शुभारंभ के साथ पात्र परिवारों को मिलने वाली सहायता का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
हिमाचल की सामाजिक सुरक्षा नीति में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना को हिमाचल सरकार की सामाजिक सुरक्षा नीति में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ परिवार के नियमित खर्च को कम करेगा।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पात्र परिवारों की सही पहचान और योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होगी। यदि लाभ तय मानदंडों के अनुसार जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है तो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए यह योजना महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है।
2 अक्तूबर को प्रस्तावित शुरुआत के साथ अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि योजना को किस तरह जमीन पर लागू किया जाता है और दो लाख परिवारों तक इसका लाभ किस गति से पहुंचता है।



