➤ हिमाचल में कमजोर पड़ा मानसून फिर सक्रिय, कांगड़ा में हुई भारी बारिश
➤ आज कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश का यलो अलर्ट, पांच दिन बारिश के आसार
➤ 23 से 30 अगस्त तक प्रदेश में सामान्य से 51 फीसदी कम बारिश, कुल्लू-लाहौल में 98-99% की कमी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में करीब एक सप्ताह तक कमजोर रहने के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। बीती रात कांगड़ा में कई स्थानों पर भारी बारिश हुई, जबकि शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सोमवार सुबह से मौसम खराब बना हुआ है। आसमान में बादल छाए हैं और कई क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया है।
मौसम विभाग (IMD) ने आज कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की भी संभावना है। मानसून के दोबारा सक्रिय होने से जहां सूखे जैसे हालात वाले क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, पेड़ गिरने और सड़क यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है।
शिमला-सोलन-सिरमौर में भी हुई भारी बारिश
बीती शाम शिमला, सोलन और सिरमौर के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। राजधानी शिमला में भी मौसम ने अचानक करवट ली और कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई। शिमला के खलीणी में बारिश के दौरान सड़क किनारे एक बड़ा पेड़ गिर गया। पेड़ की चपेट में आने से दो गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ ही प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चुनौती बढ़ गई है। खासकर ऐसे स्थान जहां पहले से भूस्खलन या सड़क क्षति का खतरा बना हुआ है, वहां भारी बारिश के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
एक सप्ताह में सामान्य से 51 फीसदी कम बारिश
भले ही अब मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी हो, लेकिन पिछले सप्ताह प्रदेश में बारिश की स्थिति बेहद कमजोर रही। 23 से 30 अगस्त के बीच हिमाचल में सामान्य से 51 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश सामान्य से काफी नीचे रही।
आंकड़े बताते हैं कि मानसून की कमजोरी का असर लगभग पूरे प्रदेश में दिखाई दिया। कई जिलों में बारिश की कमी इतनी अधिक रही कि वहां सामान्य बारिश की तुलना में बेहद कम पानी बरसा।
कुल्लू में 98 तो लाहौल-स्पीति में 99 फीसदी कम बारिश
23 से 30 अगस्त के बीच कुल्लू में सामान्य से 98 फीसदी कम और लाहौल-स्पीति में 99 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। दोनों जिलों में बारिश की यह कमी बेहद ज्यादा रही।
इसी अवधि में किन्नौर में सामान्य से 96 फीसदी कम, चंबा में 78 फीसदी कम, हमीरपुर में 74 फीसदी कम और शिमला में 63 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
मंडी में सामान्य से 39 फीसदी, सोलन में 40 फीसदी, कांगड़ा में 20 फीसदी और ऊना में 24 फीसदी कम बारिश हुई। बिलासपुर में बारिश सामान्य से तीन फीसदी कम रही।
वहीं सिरमौर ऐसा जिला रहा जहां इस अवधि में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। यहां सामान्य से तीन फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।
जिलेवार बारिश की स्थिति
| जिला | सामान्य से बारिश में कमी/बढ़ोतरी |
|---|---|
| बिलासपुर | 3% कम |
| चंबा | 78% कम |
| हमीरपुर | 74% कम |
| कांगड़ा | 20% कम |
| किन्नौर | 96% कम |
| कुल्लू | 98% कम |
| लाहौल-स्पीति | 99% कम |
| मंडी | 39% कम |
| शिमला | 63% कम |
| सोलन | 40% कम |
| ऊना | 24% कम |
| सिरमौर | 3% अधिक |
पूरे मानसून सीजन में भी 11 फीसदी कम बारिश
प्रदेश में सिर्फ पिछले सप्ताह ही नहीं, बल्कि पूरे मानसून सीजन में भी बारिश सामान्य से कम रही है। 1 जून से 30 अगस्त 2026 तक हिमाचल में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मौसम के इस पूरे आंकड़े के दौरान प्रदेश में सामान्य तौर पर 608.7 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार अब तक 542.2 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है। यानी मानसून सीजन के करीब तीन महीने बीतने के बाद भी प्रदेश सामान्य वर्षा के आंकड़े से पीछे चल रहा है।
बारिश की इस कमी का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूप में देखने को मिला है। कुछ क्षेत्रों में जहां बारिश की कमी ज्यादा रही, वहीं कुछ इलाकों में मानसून के दौरान तेज बारिश के दौर भी आए। यही वजह है कि पूरे प्रदेश का औसत सामान्य से नीचे रहने के बावजूद कुछ जिलों में भारी बारिश की घटनाएं सामने आती रही हैं।
बारिश कम, फिर भी तापमान रहा सामान्य से ज्यादा
मानसून के कमजोर रहने का असर प्रदेश के तापमान पर भी दिखाई दिया। बारिश की कमी के कारण कई शहरों में तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक अधिक बना रहा।
सबसे अधिक उल्लेखनीय स्थिति केलांग में रही। यहां अधिकतम तापमान सामान्य से 8.4 डिग्री सेल्सियस अधिक उछलकर 27.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पहाड़ी और ठंडे क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले केलांग में सामान्य से इतना अधिक तापमान दर्ज होना मौसम में आए बदलाव को दर्शाता है।
हालांकि अब मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ अगले चार से पांच दिनों में प्रदेश के तापमान में हल्की गिरावट आने की संभावना है। बादल और बारिश के कारण दिन के तापमान में कुछ कमी दर्ज की जा सकती है।
अगले पांच दिन बारिश का दौर रहने के आसार
मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल में अगले पांच दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। फिलहाल कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में यलो अलर्ट जारी किया गया है।
बारिश के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर अचानक मौसम खराब होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और कमजोर ढलानों के आसपास अनावश्यक जोखिम लेने से बचने की सलाह दी जाती है।
खासकर शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कांगड़ा और अन्य पहाड़ी जिलों में बारिश के दौरान सड़क मार्गों पर सफर करने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। बीती शाम शिमला के खलीणी में पेड़ गिरने की घटना भी इस बात का संकेत है कि तेज बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर खतरे अचानक बढ़ सकते हैं।
मानसून की वापसी से राहत की उम्मीद, लेकिन चुनौती भी बरकरार
एक सप्ताह तक कमजोर रहने के बाद मानसून के दोबारा सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद है। किसानों और बागवानों के लिए भी आने वाले दिनों की बारिश महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि भारी बारिश होने की स्थिति में फसलों, बागवानी और सड़क संपर्क को नुकसान का खतरा भी बना रहेगा।
फिलहाल हिमाचल में मौसम ने फिर करवट ली है। कांगड़ा में भारी बारिश और तीन जिलों में यलो अलर्ट के बीच अगले कुछ दिन प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। एक ओर बारिश की कमी पूरी करने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर तेज बारिश के कारण संभावित नुकसान को लेकर प्रशासन और लोगों को सतर्क रहना होगा।



