➤ लंबित वित्तीय लाभ और देनदारियों को लेकर सैकड़ों पेंशनरों ने चौड़ा मैदान में दिया धरना
➤ आक्रोश रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में बहस, शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित
➤ 31 जुलाई तक मांगें पूरी करने का मिला था भरोसा, अब पेंशनरों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के बीच राजधानी शिमला में पेंशनरों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों और वित्तीय लाभों में देरी के विरोध में विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली निकाली। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे पेंशनरों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। पेंशनरों का कहना है कि लंबे समय से उनके कई वित्तीय लाभ और देनदारियां लंबित हैं। सरकार की ओर से मांगों के समाधान को लेकर भरोसा मिलने के बावजूद निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
चौड़ा मैदान में प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने सरकार से लंबित मामलों पर जल्द फैसला लेने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के कारण क्षेत्र में आवाजाही भी प्रभावित हुई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी पेंशनरों के बीच बहस की स्थिति भी बनी।

31 जुलाई तक मांगें पूरी करने का मिला था भरोसा।
पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को बैठक हुई थी। बैठक में पेंशनरों की विभिन्न मांगों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया गया था। नेताओं का कहना है कि उस समय उन्हें 31 जुलाई तक मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया था।
पेंशनरों के मुताबिक निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी जब उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया तो उन्होंने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आंदोलन का रास्ता अपनाया। इसी कड़ी में प्रदेशभर से पेंशनर शिमला पहुंचे और विधानसभा से कुछ दूरी पर स्थित चौड़ा मैदान में धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने वित्तीय अधिकारों और लंबित देनदारियों के लिए बार-बार आंदोलन करना पड़ रहा है। पेंशनर नेताओं ने सरकार से इस मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान।
पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की।
पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की ओर से जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नेताओं ने आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव तक की चेतावनी दी है।
पेंशनरों के इस रुख से साफ है कि लंबित वित्तीय मामलों को लेकर सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और इसी दौरान पेंशनरों के सड़क पर उतरने से यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।
चौड़ा मैदान की ओर जाने वाला ट्रैफिक डायवर्ट।
पेंशनरों के प्रदर्शन को देखते हुए शिमला ट्रैफिक पुलिस को शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान बालूगंज चौक तथा रेलवे स्टेशन-कैनेडी चौक से चौड़ा मैदान की ओर आने वाले यातायात को डायवर्ट किया गया।
पुलिस ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए लोगों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। साथ ही लोगों से अनावश्यक रूप से चौड़ा मैदान की ओर जाने से बचने को कहा गया।
प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। पेंशनरों के धरने और नारेबाजी के बीच पुलिसकर्मी यातायात को सामान्य बनाए रखने में जुटे रहे।
लंबे समय से लंबित मांगों पर अब आर-पार के संकेत।
पेंशनरों के प्रदर्शन में जिस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचे, उससे उनकी नाराजगी का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा लंबित वित्तीय लाभ और देनदारियों का भुगतान है। उनका कहना है कि सरकार के साथ बातचीत में भरोसा मिलने के बावजूद जब तय समय में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
अब पेंशनर नेताओं ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। साथ ही सरकार को आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेंशनरों का यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।



