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हिमाचल विधानसभा: PM आवास योजना का होगा आंतरिक ऑडिट, सीएम सुक्खू बोले- राशि से लेकर अधूरे मकानों तक होगी जांच

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का होगा आंतरिक ऑडिट
पात्र परिवारों को मिली राशि और निर्माण की प्रगति की होगी जांच
सर्वे में छूटे पात्र लोगों को दोबारा जांच के बाद सूची में शामिल करने का प्रयास


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत मकानों के निर्माण, लाभार्थियों के चयन और सरकारी राशि के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में कहा कि प्रदेश सरकार इस योजना का आंतरिक ऑडिट करवाएगी। ऑडिट में यह देखा जाएगा कि योजना के तहत पात्र परिवारों को कितनी राशि जारी हुई, उसके मुकाबले मकान का कितना निर्माण हुआ और कहीं किस्त जारी होने में देरी के कारण मकान अधूरे तो नहीं रह गए।

यह मुद्दा विधायक बिक्रम ठाकुर के सवाल के दौरान सदन में उठा। चर्चा में परागपुर विकासखंड में योजना की स्थिति के साथ लाभार्थियों के चयन और सर्वे में संभावित खामियों का मामला भी सामने आया। विधायकों ने कहा कि यदि सर्वे में पात्र परिवार छूट गए हैं तो उन्हें योजना का लाभ दिलाने के लिए व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना चाहिए।

राशि मिली, लेकिन मकान कितना बना, अब इसकी भी होगी पड़ताल

सरकार की प्रस्तावित जांच का एक अहम पहलू यह होगा कि लाभार्थी को मिली सरकारी सहायता और मकान के निर्माण की वास्तविक प्रगति के बीच कितना तालमेल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑडिट में यह देखा जाएगा कि पात्र परिवारों को कितनी राशि मिली और उसके अनुरूप निर्माण कितना हुआ।

इसके साथ यह भी जांचा जाएगा कि किसी लाभार्थी का मकान इसलिए तो अधूरा नहीं रह गया क्योंकि उसे समय पर योजना की अगली किस्त नहीं मिल पाई। यानी ऑडिट केवल खर्च की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किस्त जारी होने और निर्माण की प्रगति के बीच संबंध को भी देखा जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना कई गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के घर का सहारा है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर सर्वे, सत्यापन, राशि जारी करने या प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के कारण मकान अधूरा रह जाता है तो उसका सीधा असर लाभार्थी परिवार पर पड़ता है।

विधायक ने उठाया सर्वे में गड़बड़ी का मुद्दा

सदन में चर्चा के दौरान विधायक चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कई पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि गलत या अधूरे सर्वे को दुरुस्त किया जाए और वास्तविक रूप से पात्र लोगों को योजना में शामिल किया जाए।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि योजना के तहत लाभार्थियों का चयन निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के आधार पर किया जाता है। यदि सर्वे के दौरान कोई पात्र परिवार छूट जाता है तो वह सरकारी आवास सहायता से वंचित हो सकता है।

सरकार की ओर से सदन में कहा गया कि सर्वे में छूटे पात्र लोगों की दोबारा जांच की व्यवस्था मौजूद है। इसके लिए ग्राम सभा या बीडीओ स्तर से सत्यापन करवाया जा सकता है। यदि जांच में संबंधित व्यक्ति पात्र पाया जाता है तो उसे अगले वर्ष की सूची में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

तीन वर्षों में 87,710 मकान स्वीकृत

पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में योजना से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 31 जुलाई तक प्रदेश में 87,710 आवास स्वीकृत किए गए हैं।

वहीं परागपुर विकासखंड में इसी अवधि में 1,108 आवासों को मंजूरी दी गई है। इससे पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।

मंत्री ने बताया कि लाभार्थियों का सत्यापन भारत सरकार के जियो आधारित आवास प्लस एप के माध्यम से किया जाता है। इससे लाभार्थियों की पहचान और उनके आवास से जुड़ी जानकारी को तकनीकी माध्यम से दर्ज और सत्यापित किया जाता है।

सर्वे में छूटे लोगों के लिए ग्राम सभा और बीडीओ से दोबारा जांच

सदन में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कोई पात्र परिवार सर्वे में छूट गया है तो उसके मामले की दोबारा जांच करवाई जा सकती है। इसके लिए ग्राम सभा अथवा बीडीओ के माध्यम से सत्यापन कराया जा सकता है।

जांच में पात्र पाए जाने वाले परिवारों को अगले वर्ष की सूची में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। इससे उन परिवारों के लिए उम्मीद बनी है, जो किसी कारण से पहले सर्वे में योजना के दायरे से बाहर रह गए।

हालांकि इस प्रक्रिया में पात्रता का सत्यापन महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार लाभार्थियों का चयन निर्धारित मानकों और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।

अधूरे मकानों की संख्या और कारण भी बने सवाल

विधायक सुखराम चौधरी ने सदन में स्वीकृत मकानों में से कितने आवास पूरे हो चुके हैं और कितने अभी अधूरे हैं, इसका आंकड़ा और अधूरे रहने के कारणों की जानकारी मांगी।

यह सवाल सीधे तौर पर योजना के जमीनी क्रियान्वयन से जुड़ा है। किसी परिवार को आवास स्वीकृत होना एक चरण है, लेकिन उसका वास्तव में पूरा होकर परिवार को रहने योग्य मिलना योजना की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सरकार की ओर से बताया गया कि योजना के तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में राशि जारी की जाती है। निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद संबंधित किस्त जारी की जाती है।

यही वजह है कि प्रस्तावित आंतरिक ऑडिट में यह भी देखा जाएगा कि राशि जारी होने की प्रक्रिया और मकान के निर्माण की प्रगति के बीच कहीं कोई असंतुलन तो नहीं है।

किस्त में देरी हुई तो मकान अधूरा रहने की भी होगी जांच

ग्रामीण इलाकों में मकान निर्माण के दौरान लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से मिलने वाली सहायता काफी महत्वपूर्ण होती है। यदि निर्माण का एक चरण पूरा होने के बाद अगली किस्त समय पर नहीं मिलती है तो कई परिवारों के लिए निर्माण आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए सरकार का आंतरिक ऑडिट यह पता लगाएगा कि कहीं किस्त जारी होने में देरी किसी मकान के अधूरा रहने का कारण तो नहीं बनी।

इस जांच के जरिए सरकार के सामने यह तस्वीर भी आ सकती है कि योजना की स्वीकृति से लेकर राशि जारी होने और निर्माण पूरा होने तक किस स्तर पर दिक्कतें सामने आ रही हैं।

परागपुर क्षेत्र पर भी रहेगी नजर

विधायक बिक्रम ठाकुर के सवाल के दौरान विशेष रूप से परागपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की स्थिति का मुद्दा उठा। क्षेत्र में 1,108 आवास स्वीकृत किए जाने की जानकारी सदन में दी गई।

अब ऑडिट के दौरान योजना की प्रगति, लाभार्थियों को जारी राशि और निर्माण की स्थिति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि स्वीकृत आवासों में कितने पूरे हुए, कितने निर्माणाधीन हैं और किन मामलों में किसी कारण से काम आगे नहीं बढ़ पाया।

यदि सर्वे में किसी पात्र परिवार के छूटने या गलत जानकारी दर्ज होने की शिकायत सामने आती है तो ग्राम सभा और बीडीओ स्तर पर दोबारा सत्यापन का विकल्प भी मौजूद रहेगा।

गरीब परिवारों के लिए योजना, इसलिए पारदर्शिता पर जोर

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना की राशि सही लाभार्थी तक पहुंचने के साथ उसका मकान निर्माण में इस्तेमाल होना भी महत्वपूर्ण है।

विधानसभा में हुई चर्चा ने योजना के दो अहम पक्षों को सामने रखा है। पहला, पात्र परिवारों की सही पहचान और दूसरा, स्वीकृत मकानों का समय पर निर्माण पूरा होना।

सरकार के आंतरिक ऑडिट से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि योजना के क्रियान्वयन में कहीं प्रशासनिक स्तर पर देरी, सर्वे में खामी या किस्त जारी करने से जुड़ी समस्या तो नहीं है।

अगर जांच में ऐसी कमियां सामने आती हैं तो उन्हें दूर करने के लिए जिम्मेदारी तय करने और प्रक्रिया में सुधार की जरूरत भी पड़ सकती है। वहीं सर्वे में छूटे वास्तविक पात्र परिवारों की दोबारा पहचान होने से उन्हें भविष्य की सूची में शामिल करने का रास्ता खुल सकता है।

विधानसभा में उठे सवालों के बाद अब ऑडिट पर नजर

विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को लेकर हुई चर्चा के बाद अब सबसे ज्यादा नजर प्रस्तावित आंतरिक ऑडिट पर रहेगी। इस जांच से योजना के कागजी आंकड़ों और जमीन पर हुए निर्माण के बीच की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

सरकार यह भी देखेगी कि लाभार्थियों को जारी धनराशि के मुकाबले निर्माण की स्थिति क्या है और क्या किसी मामले में किस्त मिलने में देरी ने निर्माण की गति प्रभावित की है।

साथ ही सर्वे में छूटे पात्र परिवारों की शिकायतों पर भी दोबारा सत्यापन का रास्ता खुला है। ऐसे में आने वाले समय में ऑडिट और पुनः सत्यापन के जरिए योजना की जमीनी स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।