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हिमाचल में बदलेंगी स्टांप ड्यूटी की दरें, महिलाओं को एक करोड़ तक की संपत्ति पर 4 फीसदी शुल्क

महिलाओं को एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर 4% स्टांप ड्यूटी देनी होगी
बाहरी खरीदारों के लिए 12% और कुछ पावर ऑफ अटॉर्नी पर 100 गुना शुल्क प्रस्तावित
अतिक्रमणकारी परिवार की बहू भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेगी


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आखिरी दिन कई महत्वपूर्ण फैसलों का गवाह बनने जा रहा है। गुरुवार को सदन में चार विधेयक चर्चा के बाद पारित किए जाने की तैयारी है। इनमें भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 सबसे अहम है। इस विधेयक के पारित होने के बाद प्रदेश में संपत्ति की खरीद-फरोख्त और कई तरह के दस्तावेजों पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी की दरों में बड़ा बदलाव हो सकता है।

सरकार ने इसके लिए भारतीय स्टांप अधिनियम की अनुसूची 1-क में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। सरकार का तर्क है कि कई दस्तावेजों पर लागू स्टांप शुल्क की दरें लंबे समय से नहीं बदली गई हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इन दरों को तर्कसंगत बनाने की जरूरत महसूस की गई है। प्रस्तावित बदलावों में महिलाओं, पुरुषों, बाहरी खरीदारों और कुछ विशेष प्रकार के संपत्ति लेनदेन के लिए अलग-अलग शुल्क का प्रावधान किया गया है।

महिलाओं के लिए एक करोड़ तक की संपत्ति पर 4 फीसदी शुल्क

प्रस्तावित संशोधन का सबसे अहम हिस्सा महिलाओं के नाम पर खरीदी जाने वाली संपत्ति से जुड़ा है। इसके तहत एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति खरीदने वाली महिलाओं से 4 फीसदी स्टांप ड्यूटी लेने का प्रस्ताव है।

वहीं, यदि संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है तो महिला और अन्य खरीदारों के लिए 8 फीसदी स्टांप ड्यूटी प्रस्तावित की गई है। इसका मतलब है कि महिलाओं को प्रस्तावित रियायती दर का लाभ एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर ही मिलेगा।

पुरुषों के लिए 40 लाख तक 6 फीसदी शुल्क

पुरुष और अन्य खरीदारों के लिए संपत्ति की कीमत के आधार पर अलग दर प्रस्तावित की गई है। 40 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर 6 फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होगी। वहीं, 40 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति पर 8 फीसदी शुल्क प्रस्तावित किया गया है।

इस बदलाव का सीधा असर जमीन, मकान और अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले खरीदारों पर पड़ेगा। संपत्ति की कीमत बढ़ने के साथ स्टांप ड्यूटी का बोझ भी उसी अनुपात में बढ़ सकता है।

हिमाचल से बाहर के लोगों के लिए 12 फीसदी स्टांप ड्यूटी

सरकार ने हिमाचल से बाहर के लोगों के लिए स्टांप ड्यूटी की दर और अधिक रखने का प्रस्ताव किया है। हिमाचल प्रदेश अभिधृति और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118(2)(ज) के तहत सरकार की अनुमति से संपत्ति का हस्तांतरण या पट्टा लेने वाले बाहरी व्यक्तियों से 12 फीसदी स्टांप शुल्क लेने का प्रावधान प्रस्तावित है।

खास बात यह है कि यह दर महिला और पुरुष दोनों बाहरी खरीदारों पर समान रूप से लागू होगी। यानी इस श्रेणी में महिला खरीदार को भी सामान्य महिला खरीदार के लिए प्रस्तावित 4 फीसदी की दर का लाभ नहीं मिलेगा।

एक साल में दोबारा रजिस्ट्री हुई तो 8 फीसदी शुल्क

सरकार ने एक ही खरीदार और विक्रेता के बीच कम अवधि में दोबारा होने वाली रजिस्ट्री को लेकर भी सख्ती का प्रावधान प्रस्तावित किया है।

यदि एक साल के भीतर उसी खरीदार और विक्रेता के बीच दोबारा रजिस्ट्री होती है और संबंधित लेनदेन का कुल मूल्य निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो पहले किए गए लेनदेन को भी जोड़कर 8 फीसदी स्टांप शुल्क लेने का प्रावधान होगा।

इस प्रावधान के पीछे मकसद संपत्ति के लेनदेन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर स्टांप शुल्क की देनदारी कम करने की संभावनाओं पर रोक लगाना माना जा रहा है।

पावर ऑफ अटॉर्नी पर सामान्य शुल्क से 100 गुना तक का प्रावधान

प्रस्तावित संशोधन में पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। हिमाचल से बाहर रहने वाले किसी गैर-निवासी के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी करने या हिमाचल से बाहर स्थित संपत्ति के संबंध में पावर ऑफ अटॉर्नी करने पर सामान्य स्टांप शुल्क से 100 गुना शुल्क वसूलने का प्रस्ताव है।

यह प्रावधान ऐसे मामलों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े कुछ लेनदेन में शुल्क का बोझ मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।

अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू भी चुनाव नहीं लड़ सकेगी

विधानसभा के आखिरी दिन सिर्फ संपत्ति और स्टांप ड्यूटी से जुड़ा विधेयक ही चर्चा में नहीं रहेगा। सदन में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 भी चर्चा के बाद पारित किया जाएगा।

इस विधेयक के जरिए पंचायती राज कानून में परिवार की परिभाषा में बदलाव प्रस्तावित है। मौजूदा प्रावधान के तहत यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है तो उसके बेटे के पंचायत या नगर निकाय चुनाव लड़ने पर रोक लगती है, लेकिन उसकी बहू चुनाव लड़ सकती है।

प्रस्तावित संशोधन के बाद यह स्थिति बदल जाएगी। अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू को भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य कर दिया जाएगा। यानी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ी चुनावी अयोग्यता का दायरा अब परिवार की बहू तक भी बढ़ जाएगा।

यह बदलाव स्थानीय निकाय चुनावों की पात्रता को सीधे प्रभावित कर सकता है। सरकार की ओर से इसे पंचायती राज कानून में मौजूद प्रावधान को अधिक स्पष्ट और व्यापक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

प्रश्नकाल में लोक निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर होंगे सवाल

विधानसभा के आखिरी दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी। इस दौरान लोक निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़े कई सवाल सदन में उठेंगे। विधायक अपने क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों, सरकारी सेवाओं और विभागीय गतिविधियों को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।

रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष को जवाब देंगे सीएम सुक्खू

सत्र के अंतिम दिन रोजगार का मुद्दा भी सदन में प्रमुखता से उठेगा। विपक्ष की ओर से रोजगार के मसले पर मांगी गई चर्चा का मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू विस्तृत जवाब देंगे।

ऐसे में विधानसभा के मानसून सत्र का अंतिम दिन राजनीतिक और नीतिगत दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। एक तरफ सरकार स्टांप ड्यूटी और पंचायती राज से जुड़े संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाएगी, वहीं दूसरी ओर रोजगार समेत कई जनहित के मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का सामना करेगी।

स्टांप ड्यूटी में प्रस्तावित बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो हिमाचल में जमीन, मकान या अन्य संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं। प्रस्तावित दरों के अनुसार खरीदार की श्रेणी और संपत्ति के मूल्य के आधार पर शुल्क अलग-अलग होगा। हालांकि, इन प्रावधानों के अंतिम रूप और लागू होने की स्थिति विधेयक के सदन से पारित होने तथा आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।