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हिमाचल में हिमुडा CEO की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया बड़ा झटका

हिमुडा CEO की नियुक्ति हाईकोर्ट ने रद्द कर दी

डॉ. सुरिंदर वशिष्ठ की नियमित चीफ इंजीनियर सेवा नहीं मानी गई

दो हफ्ते में भर्ती नियमों के तहत पात्र अधिकारी चुनने के आदेश


शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार को हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी HIMUDA के CEO-कम-सेक्रेटरी की नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने डॉ. सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की CEO-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित पद पर नियुक्ति के लिए अधिकारी का भर्ती नियमों में निर्धारित पात्रता पूरी करना जरूरी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि CEO-कम-सेक्रेटरी के पद को भर्ती नियमों के अनुसार दोबारा भरा जाए और इस प्रक्रिया में केवल पात्र अधिकारियों के मामलों पर विचार किया जाए। साथ ही याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर को भी इस पद के लिए विचार में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए 27 मई 2025 को जारी किए गए नियुक्ति आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत के इस निर्णय से उस प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जिसके तहत एक वरिष्ठ अधिकारी को अलग पद पर नियुक्त करने के बाद डॉ. वशिष्ठ को हिमुडा के CEO-कम-सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी।

हालांकि, अदालत के फैसले में डॉ. सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को एक राहत भी मिली है। CEO के रूप में कार्य करने के दौरान उन्हें अब तक जो वित्तीय लाभ प्राप्त हुए हैं, उन्हें वापस लेने का आदेश नहीं दिया गया है। यानी नियुक्ति रद्द होने के बावजूद पहले मिल चुके वित्तीय लाभ की वसूली नहीं की जाएगी।

चीफ इंजीनियर पद से शुरू हुआ था पूरा विवाद

मामले की जड़ हिमुडा के चीफ इंजीनियर पद से जुड़ी है। अंजोरी कपूर और डॉ. सुरिंदर कुमार वशिष्ठ दोनों ही हिमुडा के इंजीनियरिंग कैडर में कार्यरत थे। अदालत के सामने रखे गए रिकॉर्ड के अनुसार, अंजोरी कपूर को 9 दिसंबर 2022 को नियमित रूप से चीफ इंजीनियर (सिविल) के पद पर पदोन्नत किया गया था।

दूसरी ओर, डॉ. वशिष्ठ उस समय अधीक्षण अभियंता यानी SE के पद पर कार्यरत थे। 1 फरवरी 2023 को उनके अधीक्षण अभियंता पद को व्यक्तिगत आधार पर चीफ इंजीनियर के पद पर अपग्रेड किया गया। इसके अगले ही दिन, 2 फरवरी 2023 को उन्हें चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।

यहीं से नियुक्ति को लेकर कानूनी पेच पैदा हुआ। हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था की प्रकृति को महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, डॉ. वशिष्ठ के मामले में किया गया पद अपग्रेडेशन व्यक्तिगत आधार पर था। इसका मतलब यह था कि यह व्यवस्था केवल उनके लिए लागू थी और उनके पद छोड़ने के बाद वह पद फिर से अधीक्षण अभियंता के स्तर पर वापस हो जाना था।

इसलिए इस व्यक्तिगत अपग्रेडेशन को हिमुडा में चीफ इंजीनियर का दूसरा नियमित पद नहीं माना जा सकता था।

CEO पद के लिए नियमित सेवा क्यों जरूरी थी?

हाईकोर्ट ने इस मामले में HIMUDA भर्ती नियम 2012 और वर्ष 2019 में किए गए संशोधन का भी परीक्षण किया। इन्हीं नियमों के आधार पर अदालत ने यह तय किया कि CEO-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति के लिए किस तरह की पात्रता आवश्यक है।

नियमों के मुताबिक CEO-कम-सेक्रेटरी का पद हिमुडा के चीफ इंजीनियर (सिविल) में से पात्र अधिकारी की नियुक्ति के माध्यम से भरा जा सकता है। इसके लिए चीफ इंजीनियर के पद पर निर्धारित अवधि तक नियमित सेवा समेत अन्य निर्धारित योग्यताओं को पूरा करना आवश्यक है।

अदालत ने पाया कि डॉ. वशिष्ठ के पास चीफ इंजीनियर के पद पर वह आवश्यक नियमित सेवा नहीं थी, जो CEO-कम-सेक्रेटरी पद के लिए जरूरी थी। उनका चीफ इंजीनियर पद पर आना व्यक्तिगत आधार पर किए गए अपग्रेडेशन से जुड़ा था। ऐसे में अदालत ने माना कि इसे CEO पद के लिए जरूरी नियमित सेवा के तौर पर नहीं माना जा सकता।

यही आधार डॉ. वशिष्ठ की 27 मई 2025 को की गई CEO-कम-सेक्रेटरी नियुक्ति को नियमों के अनुरूप न मानने का प्रमुख कारण बना।

अंजोरी कपूर को पद से हटाकर बनाया गया था नया एडवाइजर पद

मामले में दूसरा अहम पहलू अंजोरी कपूर से जुड़ा रहा। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि हिमुडा में नियमित चीफ इंजीनियर का केवल एक पद था और उस पद पर अंजोरी कपूर पहले से नियमित रूप से पदोन्नत होकर कार्यरत थीं।

इसके बावजूद 3 मई 2025 को चीफ इंजीनियर के इस पद को बदलकर एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटेजी) का पद बना दिया गया। इसके बाद 27 मई 2025 को अंजोरी कपूर को इसी नए पद पर नियुक्त कर दिया गया।

इसी दिन डॉ. सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को हिमुडा का CEO-कम-सेक्रेटरी नियुक्त किया गया। अंजोरी कपूर ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान माना कि अंजोरी कपूर को CEO-कम-सेक्रेटरी पद के लिए विचार से बाहर नहीं किया जाना चाहिए था। चूंकि वह नियमित चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नत अधिकारी थीं, इसलिए नियमों के तहत उनकी पात्रता पर भी विचार किया जाना जरूरी था।

हाईकोर्ट ने सरकार को क्या आदेश दिया?

हाईकोर्ट ने डॉ. वशिष्ठ की नियुक्ति को रद्द करने के साथ ही राज्य सरकार को CEO-कम-सेक्रेटरी के पद को दोबारा भर्ती नियमों के अनुसार भरने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा है कि इस प्रक्रिया में केवल वही अधिकारी विचार के दायरे में होंगे, जो निर्धारित नियमों के तहत पात्रता पूरी करते हों। साथ ही अंजोरी कपूर के मामले पर भी नियमानुसार विचार करना होगा।

सरकार को इसके लिए दो सप्ताह के भीतर पात्र अधिकारी का चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब हिमुडा के CEO-कम-सेक्रेटरी पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया अदालत के निर्देशों और निर्धारित भर्ती नियमों के आधार पर करनी होगी।

सरकार के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

हिमुडा प्रदेश में आवास और शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को संभालने वाली प्रमुख संस्था है। ऐसे में इसके शीर्ष प्रशासनिक पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अदालत ने अपने फैसले में नियुक्ति प्रक्रिया में पात्रता और नियमित सेवा की शर्तों को अहम माना है। इससे यह स्पष्ट संकेत गया है कि किसी अधिकारी को व्यक्तिगत आधार पर दिए गए पद या अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था को नियमित पद की सेवा के बराबर मानकर उच्च पद की पात्रता तय नहीं की जा सकती।

अब सरकार के सामने दो सप्ताह के भीतर अदालत के निर्देशों के अनुसार नई प्रक्रिया अपनाने की चुनौती है। इस दौरान पात्र अधिकारियों की स्थिति और अंजोरी कपूर के दावे पर भी नियमों के अनुसार विचार करना होगा।

कुल मिलाकर यह मामला केवल एक अधिकारी की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि HIMUDA में पदों के पुनर्गठन, पदोन्नति, नियमित सेवा और उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता से जुड़े नियमों की न्यायिक जांच तक पहुंच गया। हाईकोर्ट के फैसले ने सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अब CEO-कम-सेक्रेटरी पद को नियमों के मुताबिक नए सिरे से भरने का रास्ता साफ कर दिया है।

आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार को हिमुडा CEO-कम-सेक्रेटरी पद के लिए पात्र अधिकारियों की सूची और उनकी सेवा संबंधी योग्यता पर विचार करना होगा। अंजोरी कपूर को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके बाद भर्ती नियमों के अनुरूप पात्र अधिकारी का चयन किया जाना है।

डॉ. सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की नियुक्ति रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी किस पात्र अधिकारी को सौंपती है और क्या अंजोरी कपूर का दावा इस बार विचार प्रक्रिया में आगे बढ़ता है। अदालत ने फिलहाल सरकार के लिए नियमों के दायरे में रहकर नई नियुक्ति करने की समयसीमा भी तय कर दी है।