➤ नए हथियार लाइसेंस के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य
➤ मल्टी स्टेट और ऑल इंडिया वैधता बढ़ाने पर भी सरकार लेगी अंतिम फैसला
➤ कानूनी वारिस के नाम लाइसेंस हस्तांतरण के मामले जिला स्तर पर ही निपटेंगे
शिमला। हिमाचल प्रदेश में हथियार लाइसेंस जारी करने और उनकी वैधता से जुड़े मामलों को लेकर राज्य सरकार ने प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब जिला उपायुक्त अपने स्तर पर नया हथियार लाइसेंस जारी नहीं कर सकेंगे। नए लाइसेंस के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी। गृह विभाग ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी कर आर्म्स लाइसेंस से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को स्पष्ट किया है।
सरकार ने यह व्यवस्था आर्म्स रूल्स, 2016 के तहत लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिला स्तर पर आवेदन की जांच और आवश्यक कार्रवाई के बाद नया लाइसेंस जारी करने का अंतिम निर्णय लेने के बजाय मामला राज्य सरकार के पास भेजना होगा। यानी अब जिला प्रशासन की जांच और सिफारिश के बाद सरकार की मंजूरी मिलने पर ही लाइसेंसिंग अथॉरिटी आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेगी।
आवेदन के साथ औचित्य और डीसी की सिफारिश भी जरूरी
नई व्यवस्था में केवल आवेदन या औपचारिक प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं होगा। नए हथियार लाइसेंस के लिए जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित प्रारूप में पूरा औचित्य और अपनी सिफारिश देनी होगी। इसके बाद प्रस्ताव राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
इसका सीधा अर्थ यह है कि आवेदक की ओर से आवेदन जमा करने के बाद जिला स्तर पर उसकी जांच होगी, लेकिन जांच पूरी होने के बावजूद डीसी अपने स्तर पर लाइसेंस जारी नहीं कर पाएंगे। मामले में सरकार की पूर्व अनुमति मिलने के बाद ही लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
इस बदलाव से हथियार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में राज्य स्तर पर निगरानी और नियंत्रण बढ़ेगा। जिला स्तर पर अधिकारियों को अब आवेदन के औचित्य और अपनी सिफारिश को स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड में रखना होगा।
मल्टी स्टेट और ऑल इंडिया वैधता के मामलों में भी सरकार की मंजूरी
नए हथियार लाइसेंस के अलावा ऐसे मामलों में भी राज्य सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होगी, जिनमें लाइसेंस की वैधता का क्षेत्र हिमाचल प्रदेश से बाहर बढ़ाना हो।
यदि कोई लाइसेंसधारी मल्टी स्टेट या ऑल इंडिया वैधता चाहता है, तो जिला स्तर पर अब इसका अंतिम फैसला नहीं हो सकेगा। ऐसे मामलों में भी जिला मजिस्ट्रेट को पूरे मामले का औचित्य दर्ज करते हुए अपनी सिफारिश के साथ प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना होगा।
यानी यदि कोई व्यक्ति हिमाचल के अलावा दूसरे राज्यों में भी अपने हथियार को रखने की अनुमति चाहता है या अपने हथियार लाइसेंस की वैधता पूरे देश में चाहता है, तो इस संबंध में अंतिम प्रक्रिया सरकार की पूर्व मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।
कानूनी वारिस के नाम लाइसेंस ट्रांसफर में राहत
हालांकि सरकार ने नए लाइसेंस और लाइसेंस की वैधता का क्षेत्र बढ़ाने वाले मामलों में नियंत्रण बढ़ाया है, लेकिन कानूनी वारिस के नाम हथियार लाइसेंस हस्तांतरण के मामलों में जिला स्तर पर ही कार्रवाई की जाएगी।
निर्धारित परिस्थितियों में लाइसेंसधारी के कानूनी वारिस के नाम लाइसेंस हस्तांतरित करने के लिए मामले को राज्य सरकार के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे मामलों का निपटारा निर्धारित नियमों के अनुसार जिला स्तर पर किया जाएगा।
इससे उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि प्रत्येक ऐसे मामले को राज्य स्तर पर भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। जिला प्रशासन ही नियमों के अनुरूप दस्तावेजों और पात्रता की जांच करने के बाद प्रक्रिया पूरी कर सकेगा।
मृत्यु, 70 वर्ष की आयु और 25 साल की अवधि के बाद ट्रांसफर का प्रावधान
निर्देशों के अनुसार लाइसेंसधारी की मृत्यु के बाद निर्धारित नियमों के तहत कानूनी वारिस के नाम हथियार लाइसेंस हस्तांतरित किया जा सकता है। इसके अलावा 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर और एक ही व्यक्ति के नाम लाइसेंस के 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी नियमों के अनुसार कानूनी वारिस को लाइसेंस हस्तांतरित करने का प्रावधान है।
इन मामलों में निर्धारित शर्तों और नियमों को पूरा करना जरूरी होगा। जिला स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
सरकार की ओर से इस हिस्से में जिला स्तर की व्यवस्था बनाए रखने का उद्देश्य ऐसे मामलों में प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा होने से रोकना भी माना जा रहा है। इससे पात्र कानूनी वारिसों के मामलों में अनावश्यक प्रशासनिक देरी कम होने की संभावना है।
नए लाइसेंस से लेकर वैधता विस्तार तक बदली तस्वीर
गृह विभाग के नए निर्देशों से साफ है कि हथियार लाइसेंस व्यवस्था में मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर प्रक्रिया तय की गई है। नया हथियार लाइसेंस जारी करने के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी। इसी तरह मल्टी स्टेट या ऑल इंडिया वैधता से जुड़े मामलों में भी जिला प्रशासन को अंतिम निर्णय लेने के बजाय प्रस्ताव सरकार को भेजना होगा।
वहीं, लाइसेंसधारी की मृत्यु, 70 वर्ष की आयु पूरी होने या एक ही व्यक्ति के नाम लाइसेंस के 25 वर्ष पूरे होने जैसी निर्धारित परिस्थितियों में कानूनी वारिस के नाम लाइसेंस हस्तांतरण का मामला जिला स्तर पर ही नियमों के अनुसार निपटाया जा सकेगा।
इस तरह नई व्यवस्था में नए लाइसेंस और व्यापक वैधता वाले मामलों पर राज्य सरकार की निगरानी बढ़ाई गई है, जबकि उत्तराधिकार से जुड़े निर्धारित मामलों को जिला स्तर पर ही निपटाने की व्यवस्था रखी गई है।



