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हिमाचल में 15 जजों के तबादले, हाईकोर्ट ने जारी की अधिसूचना, जानें पूरी सूची

➤ हिमाचल हाईकोर्ट ने न्यायिक सेवा के 15 अधिकारियों के तबादले किए
➤ नरेश कुमार को कुल्लू और अमन सूद को धर्मशाला का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया
➤ 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत पूरी होने के बाद ही अधिकारी छोड़ेंगे मौजूदा पद


हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक हित में न्यायिक सेवा के कैडर जिला जज और अतिरिक्त जिला जज स्तर के 15 अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां की हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से 11 सितंबर को जारी अधिसूचना में अधिकारियों को अलग-अलग न्यायालयों और पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल में जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारियों के साथ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारियों को भी नई तैनाती दी गई है।

नई नियुक्तियों के तहत नरेश कुमार को कुल्लू का जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जबकि अमन सूद को धर्मशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं अजय मेहता को सिरमौर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों को शिमला, मंडी, ऊना, रामपुर बुशहर, सोलन, सरकाघाट और अन्य स्थानों पर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

अजय मेहता को सिरमौर, अमन सूद धर्मशाला और नरेश कुमार कुल्लू भेजे गए

हाईकोर्ट की अधिसूचना के अनुसार अजय मेहता को सिरमौर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह शिमला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फॉरेस्ट) के पद पर तैनात थे। उनका तबादला सिरमौर किया गया है।

इसी तरह मदन कुमार को मंडी फैमिली कोर्ट का प्रिंसिपल जज नियुक्त किया गया है। अमन सूद को धर्मशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नरेश कुमार को कुल्लू का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। वहीं पारकाश चंद राणा को ऊना का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ संबंधित जिलों में न्यायिक प्रशासन की जिम्मेदारियों में बदलाव होगा।

शिमला में जिला जज (फॉरेस्ट) की जिम्मेदारी राजेश चौहान को

अजय मेहता के सिरमौर तबादले के बाद राजेश चौहान को शिमला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फॉरेस्ट) नियुक्त किया गया है। इस पद के साथ शिमला में वन मामलों से जुड़े न्यायिक दायित्वों की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।

वहीं डॉ. अबीरा बसु को रामपुर बुशहर में किन्नौर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इसके अलावा गौरव महाजन को सिरमौर से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-I, शिमला लगाया गया है।

इस तरह जिला स्तर पर हुए इस फेरबदल में शिमला और अन्य जिलों के न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव किया गया है।

अतिरिक्त जिला जज स्तर पर भी कई अधिकारियों की नई तैनाती

हाईकोर्ट की अधिसूचना में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारियों को भी अलग-अलग स्थानों पर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

कांता वर्मा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-I, कुल्लू नियुक्त किया गया है। अरविंद कुमार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-II, सोलन लगाया गया है।

इसी तरह परवीन गर्ग को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सरकाघाट की जिम्मेदारी दी गई है। याजवेंद्र सिंह को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-I, मंडी नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा विवेक खनाल को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सिरमौर और अमित मंडयाल को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-II, कुल्लू नियुक्त किया गया है।

इन नियुक्तियों के जरिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर पर भी न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है।

लेबर कोर्ट की पीठासीन अधिकारी पार्वीन चौहान की शिमला वापसी

तबादला आदेशों में कांगड़ा स्थित लेबर कोर्ट-कम-इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल की पीठासीन अधिकारी पार्वीन चौहान को भी वापस बुलाया गया है। उन्हें हिमाचल प्रदेश सरकार के विधि विभाग में प्रधान सचिव (कानून) के अधीन विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया है।

इस नियुक्ति के साथ पार्वीन चौहान की नई जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश सरकार के विधि विभाग में होगी।

12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत के बाद ही छोड़ेंगे कार्यभार

हाईकोर्ट ने तबादला आदेश के साथ न्यायिक अधिकारियों के कार्यभार छोड़ने को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अधिसूचना के मुताबिक, तबादले के दायरे में आने वाला कोई भी न्यायिक अधिकारी 12 सितंबर 2026 को निर्धारित राष्ट्रीय लोक अदालत का काम पूरा किए बिना अपने मौजूदा पद का कार्यभार नहीं छोड़ेगा

इसका मतलब है कि अधिकारियों को पहले निर्धारित राष्ट्रीय लोक अदालत की न्यायिक प्रक्रिया और उससे संबंधित काम पूरा करना होगा। इसके बाद ही वे नई तैनाती वाले स्थान पर कार्यभार संभालने के लिए मौजूदा पद से रिलीव होंगे।

यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे की प्रक्रिया निर्धारित है और हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह जिम्मेदारी पूरी करने के बाद ही स्थानांतरण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

ठियोग में हर महीने एक सप्ताह लगेगा सर्किट कोर्ट

हाईकोर्ट की अधिसूचना में ठियोग के लिए सर्किट कोर्ट को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार शिमला में तैनात जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फॉरेस्ट) को हर महीने के तीसरे सप्ताह में एक सप्ताह के लिए ठियोग में सर्किट कोर्ट आयोजित करना होगा

इस व्यवस्था के तहत संबंधित न्यायिक अधिकारी महीने के तीसरे सप्ताह में ठियोग जाकर एक सप्ताह तक सर्किट कोर्ट का संचालन करेंगे। इससे ठियोग और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए लोगों को न्यायिक प्रक्रिया तक स्थानीय स्तर पर पहुंच मिलने की व्यवस्था बनी रहेगी।

प्रशासनिक जरूरतों के तहत हुआ व्यापक न्यायिक फेरबदल

हाईकोर्ट की ओर से जारी इन आदेशों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश से लेकर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर तक कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। कुल 15 न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियों से हिमाचल के कई जिलों की न्यायिक व्यवस्था में बदलाव हुआ है।

कुल्लू, धर्मशाला, सिरमौर, ऊना, शिमला, मंडी, सोलन, सरकाघाट और रामपुर बुशहर समेत विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों में अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। हाईकोर्ट ने इन बदलावों को प्रशासनिक हित में किया है।

अब संबंधित अधिकारियों को हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार नई जिम्मेदारियां संभालनी होंगी। हालांकि, 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जारी विशेष निर्देश के कारण तबादले वाले अधिकारियों को पहले अपने वर्तमान पद पर निर्धारित कार्य पूरा करना होगा।