➤ 11 अक्तूबर से पहले नई औद्योगिक नीति लागू करने की तैयारी
➤ मशीनरी पर सब्सिडी से नए उद्योगों का शुरुआती निवेश घटाने का प्रस्ताव
➤ बिजली दरों में राहत देकर उत्पादन लागत कम करने पर सरकार का जोर
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नई औद्योगिक नीति को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार की कोशिश है कि मौजूदा औद्योगिक नीति की अवधि समाप्त होने से पहले नई नीति को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाए। प्रस्तावित नीति में प्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने और पहले से संचालित इकाइयों के विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए मशीनरी पर सब्सिडी देने तथा बिजली की दरों में राहत देने जैसे प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। हालांकि इन सुविधाओं का अंतिम स्वरूप, सब्सिडी की दर और बिजली में कितनी राहत मिलेगी, यह मुख्यमंत्री की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुरानी हिमाचल प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति-2019 की अवधि को सरकार ने दो महीने का विस्तार दिया था। यह विस्तारित अवधि अक्तूबर में पूरी हो रही है। ऐसे में सरकार के सामने नई नीति को समय रहते अंतिम रूप देने की चुनौती है। इससे पहले नई औद्योगिक नीति को लेकर निवेशकों और उद्योग जगत की ओर से भी लंबे समय से स्पष्टता की उम्मीद जताई जाती रही है। अगस्त में भी रिपोर्ट सामने आई थी कि पुरानी नीति को 12 अक्तूबर तक बढ़ाया गया है और नई नीति के जल्द अधिसूचित होने की प्रतीक्षा की जा रही है।
मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद होगी अधिसूचना
नई औद्योगिक नीति के प्रस्ताव पर उद्योग विभाग के अधिकारियों ने उद्योग मंत्री के साथ चर्चा की है। अब प्रस्ताव को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष रखा जाना है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद नीति को अधिसूचित कर लागू किया जाएगा। सरकार की ओर से नई नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक अनुकूल बनाना बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी नई औद्योगिक नीति को लेकर कहा था कि इसका उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाने के साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी कहा है कि नई औद्योगिक पॉलिसी तैयार है और इसे जल्द अधिसूचित किया जाएगा।
मशीनरी पर सब्सिडी से शुरुआती निवेश का बोझ घटाने की कोशिश
नई नीति में मशीनरी पर सब्सिडी का प्रस्ताव उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी नए उद्योग की स्थापना में जमीन, भवन, मशीनरी और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर शुरुआती स्तर पर बड़ी पूंजी लगती है। ऐसे में मशीनरी की लागत में सरकारी सहायता मिलने से नए निवेशकों के शुरुआती वित्तीय बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।
सरकार का फोकस केवल नए उद्योग लगाने तक सीमित नहीं रहने की बात कही जा रही है। पहले से प्रदेश में संचालित औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहित करने की दिशा में नीति तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि मौजूदा उद्योग अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकें और नए निवेश के लिए भी वातावरण तैयार हो।
हालांकि मशीनरी सब्सिडी की वास्तविक दर, पात्रता की शर्तें और इसका लाभ किन श्रेणियों के उद्योगों को मिलेगा, इसकी विस्तृत जानकारी नीति की अधिसूचना के बाद ही सामने आएगी। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित प्रावधान के तौर पर ही देखा जा रहा है।
बिजली की लागत कम करने पर भी जोर
नई औद्योगिक नीति में बिजली की दरों में राहत देने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। उद्योगों के लिए बिजली उत्पादन लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। बिजली महंगी होने पर उत्पादन लागत बढ़ती है और इसका असर उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ सकता है।
हाल में ऊना के औद्योगिक क्षेत्रों से भी बिजली और बढ़ती उत्पादन लागत को लेकर उद्योग जगत की चिंताएं सामने आई हैं। हरोली के बाथू-बाथड़ी-टाहलीवाल औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी से उत्पादन महंगा होने की बात कही थी। ऐसे माहौल में नई औद्योगिक नीति में बिजली राहत का प्रस्ताव उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
सरकार इससे पहले भी प्रदेश के उद्योगों को पड़ोसी राज्यों की तुलना में बिजली दरों में राहत देने का दावा कर चुकी है। सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा था कि कई श्रेणियों के हिमाचली उद्योगों को पड़ोसी राज्यों की तुलना में सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। नई नीति में प्रस्तावित राहत इसी व्यापक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की दिशा में देखी जा सकती है।
निवेश और रोजगार पर सरकार का फोकस
नई औद्योगिक नीति के पीछे सरकार का एक बड़ा लक्ष्य निवेश और रोजगार बढ़ाना है। राज्य में उद्योगों का विस्तार होने से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, सेवा, आपूर्ति और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
जून 2026 में राज्य की सिंगल विंडो क्लियरेंस एंड मॉनिटरिंग अथॉरिटी ने 42 औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इन प्रस्तावों में करीब 5,877.01 करोड़ रुपये के निवेश और 13,355 रोजगार अवसरों की संभावना बताई गई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को रोजगार सृजन से जोड़कर देख रही है।
ऐसे में नई नीति के माध्यम से सरकार निवेशकों को अधिक स्पष्ट और आकर्षक प्रोत्साहन देने की कोशिश कर सकती है। हालांकि वास्तविक निवेश और रोजगार पर इसका प्रभाव नीति लागू होने के बाद उसके प्रावधानों, उद्योगों की प्रतिक्रिया और जमीन पर मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करेगा।
अंतिम तस्वीर अधिसूचना के बाद होगी साफ
फिलहाल नई औद्योगिक नीति के प्रमुख प्रस्तावों में मशीनरी सब्सिडी, बिजली दरों में राहत, नए निवेश को प्रोत्साहन और मौजूदा उद्योगों के विस्तार को आसान बनाने जैसे मुद्दे सामने आए हैं। लेकिन इन सभी प्रावधानों की अंतिम स्थिति मुख्यमंत्री की मंजूरी और आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।
उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर है कि नई नीति में सब्सिडी की वास्तविक दर क्या होगी, बिजली में कितनी राहत मिलेगी, किन उद्योगों को इसका लाभ मिलेगा और निवेश की प्रक्रिया को कितना सरल बनाया जाएगा। इन सवालों के जवाब नई औद्योगिक नीति की अधिसूचना के साथ सामने आने की उम्मीद है।



