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अभिनेता मुश्ताक खान का 75 साल की उम्र में निधन, ‘वेलकम’ के बल्लू से लेकर ‘आशिकी’ के रफू मास्टर तक यादगार रहा सफर

➤ मुश्ताक खान का 75 साल की उम्र में निधन

➤ 15 दिनों से मुंबई के नानावती अस्पताल में चल रहा था इलाज

➤ 250 से ज्यादा फिल्मों और कई टीवी शोज में छोड़ी अभिनय की छाप


हिंदी सिनेमा के जाने-माने चरित्र अभिनेता मुश्ताक खान का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। ‘वेलकम’ में बल्लू और ‘आशिकी’ में रफू मास्टर जैसे यादगार किरदारों से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वाले मुश्ताक खान ने 24 सितंबर को मुंबई के नानावती अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले करीब 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। उनके बिजनेस पार्टनर शिवम ने उनके निधन की पुष्टि की है। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद परिवार, फिल्म जगत और उनके चाहने वालों में शोक का माहौल है। उनका अंतिम संस्कार 25 सितंबर को मुंबई में किया जाएगा।

मुश्ताक खान पिछले करीब पांच साल से कैंसर से जूझ रहे थे। जानकारी के मुताबिक, बीमारी का पता चलने के बाद उनका इलाज हुआ था और वह कुछ समय के लिए स्वस्थ भी हो गए थे। हालांकि बाद में बीमारी दोबारा लौट आई। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में करीब 15 दिनों तक उपचार चलने के बाद गुरुवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

थिएटर से शुरू हुआ था अभिनय का सफर

मुश्ताक खान का जन्म मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे में हुआ था। अभिनय की दुनिया में आने से पहले उन्होंने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। रंगमंच के अनुभव ने उन्हें अलग-अलग तरह के किरदारों को समझने और उन्हें सहजता से पर्दे पर उतारने में मदद की।

साल 1980 में उन्होंने फिल्म ‘थोड़ी सी बेवफाई’ और ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उनका अभिनय सफर लगातार आगे बढ़ता गया। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने अलग-अलग जॉनर की फिल्मों में काम किया और खास तौर पर सपोर्टिंग तथा कॉमिक किरदारों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।

 250 से ज्यादा फिल्मों में किया अभिनय

मुश्ताक खान ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 250 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। बड़े पर्दे के अलावा उन्होंने टेलीविजन पर भी कई चर्चित धारावाहिकों में काम किया। ‘अदालत’, ‘चाचा चौधरी’, ‘टेढ़े-मेढ़े सपने’ और ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ जैसे टीवी शोज में भी दर्शकों ने उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं में देखा।

उनकी खासियत यह थी कि वह छोटे से छोटे किरदार को भी अपनी अदाकारी से यादगार बनाने की कोशिश करते थे। संवाद अदायगी, कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय के कारण उन्हें फिल्म निर्माताओं और दर्शकों दोनों का भरोसा मिला।

 ‘आशिकी’ के रफू मास्टर ने बनाई खास पहचान

मुश्ताक खान के करियर की चर्चित फिल्मों में 1990 की ‘आशिकी’ भी शामिल रही। इस फिल्म में उन्होंने दर्जी रफू मास्टर का किरदार निभाया था। उनका यह किरदार फिल्म की कहानी में छोटा होने के बावजूद दर्शकों के बीच अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहा।

इसके बाद 1993 में आई ‘हम हैं राही प्यार के’ में उन्होंने दक्षिण भारतीय लहजे वाले भगवती प्रसाद मिश्रा का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनके अभिनय और संवाद बोलने के अंदाज को काफी पसंद किया गया।

 ‘वेलकम’ के बल्लू से घर-घर में मिली पहचान

मुश्ताक खान को साल 2007 में रिलीज हुई ‘वेलकम’ से नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच बड़ी पहचान मिली। फिल्म में उन्होंने मजनू भाई यानी अनिल कपूर के साथी बल्लू का किरदार निभाया था। फिल्म की कॉमेडी और कलाकारों की टाइमिंग के बीच उनका किरदार भी दर्शकों को खूब पसंद आया।

‘वेलकम’ के बाद मुश्ताक खान की पहचान एक ऐसे अभिनेता के रूप में और मजबूत हुई, जो कहानी में सीमित समय के लिए दिखाई देने के बावजूद अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींच सकता था।

 इन फिल्मों में भी यादगार रहे किरदार

मुश्ताक खान ने अपने करियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया। ‘दिल है कि मानता नहीं’ में बस कंडक्टर, ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में गुल खान और ‘मुझसे शादी करोगी’ में चुटकी बाबा जैसे किरदारों में भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।

1990 के दशक में ‘सड़क’, ‘साथी’, ‘क्रांतिवीर’, ‘राजा’, ‘मेजर साब’ और ‘मन’ जैसी फिल्मों में भी वह नजर आए। इस दौर में हिंदी सिनेमा में चरित्र कलाकारों की भूमिकाएं कहानी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ हास्य और भावनात्मक दृश्यों में भी महत्वपूर्ण होती थीं और मुश्ताक खान ने ऐसे कई किरदारों को प्रभावी ढंग से निभाया।

 कॉमेडी फिल्मों में भी खूब पसंद किए गए

मुश्ताक खान की कॉमिक टाइमिंग उनकी पहचान का अहम हिस्सा रही। ‘हेरा फेरी’, ‘जोड़ी नं. 1’, ‘राउडी राठौर’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उन्होंने हास्य से जुड़े किरदार निभाए।

उनकी अदाकारी की खास बात यह रही कि वह केवल मुख्य कलाकारों के आसपास मौजूद रहने वाले अभिनेता नहीं थे, बल्कि अपने संवाद और हाव-भाव से दृश्य को प्रभावी बनाने की क्षमता रखते थे। यही वजह रही कि लंबे समय तक हिंदी फिल्मों में चरित्र और सपोर्टिंग रोल्स के लिए उनका इस्तेमाल होता रहा।

 आखिरी दौर तक फिल्मों से जुड़े रहे

मुश्ताक खान का अभिनय सफर केवल पुराने दौर तक सीमित नहीं रहा। वह हाल के वर्षों में भी फिल्मों में सक्रिय रहे। ‘स्त्री’ और ‘स्त्री 2’ जैसी चर्चित फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया।

इस तरह चार दशक से अधिक समय तक हिंदी सिनेमा में सक्रिय रहने वाले मुश्ताक खान ने अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों के सामने अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाई। कभी कॉमेडी, कभी सहायक भूमिका तो कभी किसी खास अंदाज वाले चरित्र के जरिए उन्होंने फिल्मों में अपनी जगह बनाई।

मुश्ताक खान के निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे चरित्र अभिनेता को खो दिया, जिसने बड़े पर्दे पर मुख्य भूमिकाओं के बजाय अपने छोटे-बड़े किरदारों से दर्शकों के बीच पहचान बनाई। ‘आशिकी’ के रफू मास्टर से लेकर ‘वेलकम’ के बल्लू तक उनके कई किरदार लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बने रहे।