Follow Us:

हिमाचल में इलेक्शन कमीशन के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल

➤ हिमाचल में चुनाव आयोग और पीएम के खिलाफ प्रदर्शन

➤ SIR के विरोध में सोलन समेत सभी जिलों में पुतला दहन

➤ 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का कांग्रेस का आरोप


हिमाचल प्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में आज कांग्रेस पार्टी ने राज्य के सभी जिलों में उग्र प्रदर्शन किया है। डीसी ऑफिस के बाहर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंके गए, जबकि सोलन में CEC के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी जलाया गया। इस दौरान चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। सोलन में प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं होता और ज्ञानेश कुमार को उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से देश के लगभग 13 करोड़ पात्र मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है।

शिमला जिला शहरी कांग्रेस अध्यक्ष इंद्रजीत ने इसे लोकतंत्र की सीधी हत्या करार देते हुए कहा कि देश के करोड़ों लोगों को उनके वोट डालने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है और जनता के साथ विश्वासघात हुआ है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को सलाखों के पीछे भेजने की मांग की। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में CEC को हटाने की मांग को लेकर एक बड़ा अभियान चला रही है। पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिकों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जबकि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी कांग्रेस ने शिमला के कसुम्प्टी स्थित इलेक्शन डिपार्टमेंट ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करते हुए सीईसी का पुतला फूंका था और विभाग के बोर्ड पर कालिख पोतकर ‘चोर आयोग’ लिख दिया था। हिमाचल कांग्रेस के संगठन महासचिव विनोद जिंटा ने बताया कि राहुल गांधी पिछले तीन साल से चुनाव में गड़बड़ी का यह मुद्दा उठाते आ रहे हैं, और अब चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आने के बाद उनके आरोप बिल्कुल सही साबित हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने भी स्पष्ट किया कि SIR के खिलाफ इस लड़ाई को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे अभियानों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए विरोध जारी रहेगा।