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धर्मशाला में दलाई लामा से मिले अमेरिकी सांसद, तिब्बत की स्वतंत्रता के समर्थन में दोहराया रुख

➤ अमेरिकी सांसदों ने दलाई लामा से की मुलाकात
➤ तिब्बतियों की आकांक्षाओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर चर्चा
➤ उत्तराधिकारी चयन में चीन के हस्तक्षेप पर जताई चिंता


धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित मैक्लोडगंज में बुधवार को अमेरिका के पांच सदस्यीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से उनके निवास पर मुलाकात की। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट की अगुवाई में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान तिब्बत की मौजूदा स्थिति, तिब्बती लोगों की आकांक्षाओं, उनकी स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बती लोगों के प्रति अमेरिका के समर्थन को दोहराया और दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में चीन के संभावित हस्तक्षेप को लेकर भी चिंता व्यक्त की। इस मुलाकात ने ऐसे समय में तिब्बत के मुद्दे को फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है, जब दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर चीन और तिब्बती पक्ष के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में ब्रायन मास्ट, जेम्स गैलाघर, जिमी पैट्रोनिस, श्री थानेदार और हेली स्टीवंस शामिल रहे। दलाई लामा से बातचीत के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बती समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों को समझने पर जोर दिया। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि तिब्बती लोगों की आकांक्षाओं और उनकी धार्मिक परंपराओं को लेकर लगातार संवाद जरूरी है।

मुलाकात के बाद ब्रायन मास्ट ने कहा कि दलाई लामा के साथ तिब्बत की स्थिति, तिब्बती स्वतंत्रता और चीन की नीतियों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हुई। उन्होंने तिब्बती आध्यात्मिक परंपरा को लेकर भी चिंता जाहिर की और कहा कि इसे बीजिंग के हस्तक्षेप के बिना आगे बढ़ने की अनुमति मिलनी चाहिए। मास्ट के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य दलाई लामा की बात सुनना और तिब्बती समुदाय की चिंताओं को सीधे समझना था।

अमेरिकी सांसद जेम्स गैलाघर ने तिब्बती समुदाय के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि तिब्बती लोगों से संवाद और उनके मुद्दों को समझना जरूरी है। वहीं हेली स्टीवंस ने शांति, लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। उनके बयान में तिब्बती समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े सवालों को प्रमुखता मिली।

इस मुलाकात में दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन का मुद्दा भी खास चर्चा में रहा। तिब्बती धार्मिक परंपरा के अनुसार उत्तराधिकारी का चयन एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रक्रिया मानी जाती है, जबकि चीन इस विषय पर अपना अलग रुख रखता है। अमेरिकी सांसदों ने आशंका जताई कि चीन इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से उत्तराधिकारी चयन का मुद्दा अब धार्मिक परंपरा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का विषय भी बना हुआ है।

ब्रायन मास्ट ने इस बात पर जोर दिया कि तिब्बती आध्यात्मिक परंपरा के भविष्य से जुड़े फैसलों में तिब्बती धार्मिक परंपरा और समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर दलाई लामा और तिब्बती समुदाय की बात को सुना जाना जरूरी है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की धर्मशाला यात्रा से पहले सांसदों ने नई दिल्ली में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल धर्मशाला पहुंचा और दलाई लामा के साथ बैठक की।

दलाई लामा से इस मुलाकात के दौरान शांति, लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और तिब्बत की स्थिति जैसे विषय सामने आए। अमेरिकी सांसदों ने तिब्बती समुदाय के मुद्दों पर अपनी रुचि और समर्थन को दोहराया। दूसरी ओर, चीन तिब्बत के राजनीतिक सवाल और दलाई लामा से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से अलग रुख रखता रहा है।

धर्मशाला में हुई यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि दलाई लामा के उत्तराधिकारी से जुड़ा सवाल आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। तिब्बती पक्ष अपने धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थानों की परंपरा के अनुसार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात करता रहा है, जबकि चीन इस मामले में अपनी भूमिका को लेकर अलग दृष्टिकोण रखता है।

अमेरिकी सांसदों की यह यात्रा एक बार फिर दिखाती है कि तिब्बत का मुद्दा केवल धार्मिक विषय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकार संबंधी सवाल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। धर्मशाला में दलाई लामा से हुई बातचीत के बाद इन मुद्दों को लेकर आने वाले समय में कूटनीतिक चर्चाओं के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।