Follow Us:

वीरभद्र की ‘लीगेसी’ पर छलका प्रतिभा सिंह का दर्द: बोलीं- राजा साहब को गुजरे 4 साल ही हुए, पोस्टर से फोटो गायब, मंच पर भी जिक्र नहीं

➤ कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने वीरभद्र सिंह की लीगेसी और कार्यक्रमों में अनदेखी को लेकर नाराजगी जताई है
➤ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू के रोहड़ू और रामपुर दौरों के पोस्टरों से वीरभद्र सिंह की फोटो गायब थी
➤ प्रतिभा सिंह ने सवाल उठाया कि राजा साहब को गुजरे अभी 4 साल ही हुए हैं और इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया गया


हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत (लीगेसी) को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर अंदरूनी कलह और सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है। वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी और कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मंगलवार को रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया दौरों और कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। प्रतिभा सिंह का यह दर्द उस समय छलका जब उन्होंने देखा कि राज्य के विकास में छह दशक तक अहम भूमिका निभाने वाले कद्दावर नेता को आयोजकों द्वारा दरकिनार किया जा रहा है।

दरअसल, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पिछले दिनों रोहड़ू और रामपुर विधानसभा क्षेत्रों के दौरे पर थे। गौर करने वाली बात यह है कि रोहड़ू क्षेत्र वीरभद्र सिंह की मुख्य राजनीतिक कर्मभूमि रहा है, जहाँ से उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वीरभद्र सिंह अपने जीवनकाल में छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे तथा कई बार सांसद और विधायक चुने गए। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री के इन दौरों के दौरान लगाए गए आधिकारिक पोस्टरों से वीरभद्र सिंह की फोटो पूरी तरह नदारद थी और मंच पर उनके योगदान का कोई जिक्र तक नहीं किया गया।

इस पूरी अनदेखी पर खुलकर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को इस दुनिया से विदा हुए अभी केवल चार-साढ़े चार साल ही हुए हैं और इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आयोजकों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि प्रशासन या आयोजकों ने तस्वीर नहीं लगाई थी, तो कम से कम उनके अपने चाहने वाले और समर्थक खुद ही पोस्टर छपवाकर लगा सकते थे। उन्होंने आगे कहा कि जब नेता मंच से भाषण दे रहे थे, तब कम से कम राजा साहब के कामों का जिक्र तो किया जाना चाहिए था, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को जान सके और सीख ले सके।

तुलना करते हुए प्रतिभा सिंह ने कहा कि जब पार्टी के नेता सिरमौर क्षेत्र में जाते हैं, तो वे हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ते, क्योंकि वे सिरमौर से ताल्लुक रखते थे और हमारे लिए आदरणीय हैं। ठीक उसी प्रकार, वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। उन्हें याद रखना और आने वाली पीढ़ी को उनके कार्यों के बारे में बताना हर कांग्रेसी का कर्तव्य होना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिभा सिंह का यह बयान केवल एक परिवार की टीस नहीं है, बल्कि कांग्रेस संगठन के मौजूदा नेतृत्व और वीरभद्र सिंह परिवार के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को एक बार फिर हवा दे रहा है। विपक्षी दल भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि सुक्खू सरकार के कार्यकाल के दौरान पहले भी वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापना और सम्मान को लेकर मंत्रिमंडल स्तर तक खींचतान देखने को मिल चुकी है। छह दशक तक कांग्रेस की राजनीति की धुरी रहे वीरभद्र सिंह की लीगेसी पर छिड़ी इस नई बहस ने एक बार फिर पार्टी की आंतरिक राजनीति में सुगबुगाहट तेज कर दी है।