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एचपीएमसी बनाएगा सेब की शराब, जानें क्या है एप्पल श्नैप्स और कैसे तैयार होगा हिमाचली सेब से

➤ सेब से तैयार होने वाला मादक पेय है एप्पल श्नैप्स
➤ शिमला की पराला मंडी के पास 8.19 करोड़ से लगेगा नया प्लांट
➤ बागवानों को खराब या कम मूल्य वाली उपज के लिए मिलेगा नया बाजार


शिमला। हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के लिए मूल्यवर्धन और नए बाजार से जुड़ी एक अहम पहल सामने आई है। अब प्रदेश के सेब से एप्पल श्नैप्स तैयार किया जाएगा। इसके लिए जिला शिमला की पराला सेब मंडी के समीप स्थित एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र में अलग से प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 8.19 करोड़ रुपये बताई गई है। शुक्रवार को बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई एचपीएमसी निदेशक मंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। एचपीएमसी के अनुसार यह देश का पहला सक्रिय और सत्यापित एप्पल श्नैप्स संयंत्र होगा। इसका उद्देश्य केवल नया उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि सेब की ऐसी उपज का भी व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ाना है, जिसे ताजा फल के रूप में अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती।

एप्पल श्नैप्स क्या होता है?

आसान भाषा में समझें तो एप्पल श्नैप्स सेब से तैयार किया जाने वाला एक मादक पेय है। इसे सेब के प्रसंस्करण और विशेष विधि से तैयार किया जाता है और इसे उच्च गुणवत्ता वाली शराब की श्रेणी में रखा जाता है। यानी यह सामान्य सेब का जूस या एप्पल ड्रिंक नहीं है, बल्कि शराब की श्रेणी का उत्पाद है।

श्नैप्स शब्द आम तौर पर ऐसे मादक पेयों के लिए इस्तेमाल होता है, जिन्हें विशेष प्रसंस्करण या आसवन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। एप्पल श्नैप्स में सेब इसका मुख्य आधार होता है। इसकी प्रकृति सामान्य एप्पल जूस, एप्पल जूस ड्रिंक या एप्पल साइडर से अलग होती है। हिमाचल में प्रस्तावित संयंत्र का उद्देश्य इसी तरह के सेब आधारित मादक पेय का व्यावसायिक उत्पादन करना है।

8.19 करोड़ रुपये की लागत से लगेगा प्लांट

एप्पल श्नैप्स के उत्पादन के लिए पराला के पास एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र में अलग प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 8.19 करोड़ रुपये है। एचपीएमसी का कहना है कि इस पहल से सेब के प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा और फल की उपज से अधिक मूल्य हासिल करने के नए रास्ते खुलेंगे।

वर्तमान में एचपीएमसी एप्पल वाइन का उत्पादन कर रहा है। अब एप्पल श्नैप्स को नए उत्पाद के तौर पर विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इससे निगम के सेब आधारित उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार होने की उम्मीद है।

बागवानों को कैसे होगा फायदा?

इस परियोजना का एक अहम उद्देश्य बागवानों के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना है। हर साल बड़ी मात्रा में ऐसी सेब की उपज भी सामने आती है, जिसे आकार, गुणवत्ता या अन्य कारणों से ताजा फल के बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती। ऐसी उपज का प्रसंस्करण करके उससे वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

एचपीएमसी के परामर्शक केके सूद के अनुसार वर्तमान में कोई भी वाणिज्यिक कंपनी सत्यापित एप्पल श्नैप्स का सक्रिय रूप से उत्पादन नहीं कर रही है। ऐसे में प्रस्तावित संयंत्र को एक नए व्यावसायिक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी सेब की उपज का भी उपयोग करना है, जिसे ताजा फल के रूप में अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता।

बागवानी क्षेत्र में मूल्यवर्धन पर जोर

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बागवानी क्षेत्र में अधिक मूल्यवर्धन, बेहतर बाजार पहुंच और व्यापक व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराना है। यानी सेब को केवल ताजा फल के रूप में बेचने के बजाय उससे अलग-अलग प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर उसकी आर्थिक उपयोगिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

हिमाचल की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्र में सेब उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में प्रसंस्करण आधारित उत्पादों के विस्तार से सेब की खपत के लिए अतिरिक्त रास्ते तैयार हो सकते हैं। इससे बाजार में ताजा सेब की मांग से अलग प्रसंस्कृत उत्पादों का क्षेत्र भी विकसित हो सकता है।

एचपीएमसी की पुरानी परिसंपत्तियों के इस्तेमाल पर भी चर्चा

एचपीएमसी निदेशक मंडल की बैठक में केवल एप्पल श्नैप्स प्लांट पर ही चर्चा नहीं हुई। निगम की निष्क्रिय और कम उपयोग में आ रही परिसंपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। इसके लिए मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से इन परिसंपत्तियों के उपयोग की संभावनाएं तलाशने का निर्णय लिया गया।

इसका मकसद निगम की मौजूदा संपत्तियों का बेहतर व्यावसायिक उपयोग करना और उनसे अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है।

खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों का होगा आधुनिकीकरण

एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों के आधुनिकीकरण और उन्नयन पर भी करीब 1.69 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही निगम के उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।

घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिमाचल के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए नए बाजारों की पहचान करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। ऐसे में एप्पल श्नैप्स प्लांट को केवल एक नए उत्पाद की शुरुआत के तौर पर नहीं, बल्कि हिमाचल की सेब आधारित प्रसंस्करण व्यवस्था को विस्तार देने वाली व्यापक योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, एप्पल श्नैप्स परियोजना के जरिए हिमाचल में सेब की वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। खास बात यह है कि जिस सेब को ताजा फल के बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती, उसके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए भी एक नया रास्ता तैयार हो सकता है।