Follow Us:

संसद में गूंजा पौंग विस्थापितों का दर्द, अनुराग ठाकुर भावुक, 50 साल का इंतजार—6,700 परिवार आज भी जमीन से वंचित

➤ संसद में अनुराग ठाकुर ने पौंग डैम विस्थापितों की पीड़ा जोरदार तरीके से उठाई
➤ पुनर्वास के लिए इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी व दोनों राज्यों की साझा समिति बनाने की मांग
➤ 50 वर्ष बाद भी 6,700 से अधिक परिवारों को भूमि न मिलने पर जताई गहरी चिंता


हिमाचल प्रदेश। लोकसभा में शुक्रवार को हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर ने शून्यकाल के दौरान पौंग डैम (महाराणा प्रताप सागर) के विस्थापितों की 50 वर्ष पुरानी पीड़ा को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा के 339 गांवों के लगभग 20,772 परिवार आज भी अधूरे पुनर्वास की मार झेल रहे हैं और उनमें से 6,700 से अधिक परिवारों को अब तक भूमि आवंटन नहीं हुआ है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के लोगों ने हमेशा अपने पानी, जवानी और कुर्बानी से देश का सम्मान बढ़ाया है, लेकिन पौंग डैम विस्थापितों के साथ किया गया वादा आज भी अधूरा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जलशक्ति मंत्रालय और गृह मंत्रालय की अगुवाई में राजस्थान व हिमाचल की सरकारों के साथ इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी तुरंत गठित की जाए ताकि तेज़ी से समाधान निकले।

उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि 1970 के MoU और 1972 के राजस्थान कॉलोनाइज़ेशन रूल्स के अनुसार इन लोगों को राजस्थान के इरिगेटेड कमांड एरिया में बसाने का वादा किया गया था। कई बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश, 1996 का फैसला और दिसंबर 2024 की निरीक्षण रिपोर्ट आने के बावजूद, पुनर्वास आज भी अधूरा है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि कई परिवार आज भी बुनियादी ढांचे की कमी, जमीन पर कब्ज़े, कागजी बाधाओं और पुनर्वास प्रक्रिया की धीमी प्रगति से परेशान हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है कि इन परिवारों को वह सम्मान, जमीन और बुनियादी सुविधाएं मिलें जिनका उनसे वादा किया गया था।

उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार—

  • लंबित भूमि आवंटन को मॉनिटर करने के लिए हाई-पावर कमेटी को मज़बूत करे

  • पुनर्वास क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बजट आवंटन सरल बनाए

  • विस्थापितों के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट और किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया आसान करे

कांगड़ा के सांसद राजीव भारद्वाज ने भी इस मुद्दे का समर्थन किया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि इन परिवारों का दर्द आखिर कब खत्म होगा—50 वर्ष बहुत लंबा समय है।