➤ डलहौजी के राकेश कुमार के पक्ष में उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
➤ सर्जरी के दौरान पेट में छोड़ी गई सर्जिकल सामग्री का मामला
➤ मल्होत्रा अस्पताल बद्दी के दो डॉक्टरों पर 5 लाख का जुर्माना
चंबा जिले के डलहौजी उपमंडल के अंतर्गत आने वाले दुहका क्षेत्र के एक निवासी के साथ चिकित्सा जगत की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। करीब एक साल पहले पेट के एक साधारण ऑपरेशन के बाद शुरू हुए गंभीर और असहनीय दर्द ने एक ऐसे चौंकाने वाले सच से पर्दा उठाया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। पीड़ित राकेश कुमार को पेट की पथरी की शिकायत के बाद 29 जुलाई 2019 को बद्दी स्थित मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका पित्ताशय का ऑपरेशन किया गया और तीन अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद सितंबर 2020 में उनके पेट में अचानक तेज दर्द उठने लगा।
जब पीड़ित ने अपनी इस पीड़ा से निजात पाने के लिए चंडीगढ़ में 13 सितंबर 2020 को सीईसीटी स्कैन करवाया, तो रिपोर्ट में जो सामने आया उसने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए। रिपोर्ट के अनुसार पित्ताशय के नीचे करीब आठ गुणा आठ सेंटीमीटर का एक बड़ा संग्रह दिखाई दिया, जिसके भीतर टांके से जुड़ी सामग्री और विदेशी वस्तु होने के संकेत मिले। इसके बाद पठानकोट में अल्ट्रासाउंड करवाने पर यह पूरी तरह साफ हो गया कि पहली सर्जरी के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली सर्जिकल सामग्री मरीज के पेट के अंदर ही छोड़ दी गई थी। अपनी जान के खतरे को भांपते हुए पीड़ित ने पंचकूला के धवन अस्पताल में इलाज करवाया, जहां एक अक्टूबर 2020 को उनकी दूसरी जटिल सर्जरी करके पेट के अंदर से उस विदेशी सामग्री को बाहर निकाला गया।
इस पूरे प्रकरण के बाद पीड़ित ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को समझते हुए आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर की बेंच ने तमाम चिकित्सकीय रिकॉर्ड और साक्ष्यों की बारीकी से समीक्षा की। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से चिकित्सकीय लापरवाही और सेवा में गंभीर कमी का मामला माना। अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए 24 सितंबर को अपना फैसला सुनाया और दोनों डॉक्टरों को संयुक्त एवं पृथक रूप से शिकायतकर्ता को 5,12,026 रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए। इसके अलावा आयोग ने शिकायत दर्ज करने की तिथि से लेकर भुगतान होने तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज और पंद्रह हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने के भी कड़े निर्देश जारी किए हैं।



