➤ चिट्टे की लत में युवक ने मां से मारपीट की, नशा खरीदने के लिए एफडी भी तुड़वाई
➤ ठियोग में विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविर में एसडीएम ने सुनाई मां की दर्दनाक आपबीती
➤ 90 प्रतिशत युवाओं ने दोस्त के कहने पर ली पहली डोज, नशे की गिरफ्त में फंसी युवा पीढ़ी
नशे की लत किस तरह परिवारों को तबाह कर रही है, इसका दिल दहला देने वाला उदाहरण ठियोग में सामने आया। एक युवक ने चिट्टे की लत में अपनी ही मां के साथ मारपीट की और नशा खरीदने के लिए एफडी तुड़वा दी। यह आपबीती ठियोग के एसडीएम डॉ. शशांक गुप्ता ने मतियाणा स्कूल में आयोजित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त शिविर के दौरान साझा की।
एसडीएम ने बताया कि एक बुजुर्ग मां उनके कार्यालय पहुंची और रोते हुए कहा कि उसका बेटा नशे का आदी हो चुका है। उसने न केवल मारपीट की, बल्कि एफडी तुड़वाकर उस पैसे से चिट्टा खरीदकर नशा किया। मां ने कहा कि बेटा बुढ़ापे का सहारा बनने वाला था, लेकिन नशे ने उसे हिंसक बना दिया है।
मां ने प्रशासन से बेटे को नशा मुक्ति केंद्र भेजने की गुहार लगाई और कहा कि वह बेटे को खोना नहीं चाहती, बल्कि उसे सुधरते देखना चाहती है। इस पर एसडीएम ने पुलिस अधिकारियों से बात कर युवक को समझाया और पुलिस को उस पर निगरानी रखने के निर्देश दिए।
एसडीएम ने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर बीड़ी, सिगरेट और शराब से होती है, लेकिन धीरे-धीरे युवा सिंथेटिक ड्रग्स की ओर बढ़ जाते हैं। वहीं डीएसपी ने बताया कि नशे के आदी व्यक्ति को सही तरीके से अस्पताल में उपचार कराना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार ने चिट्टा मुक्त हिमाचल संकल्प के तहत एंटी चिट्टा जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत प्रदेशभर में वॉकथॉन आयोजित किए जा रहे हैं और नशा तस्करों की सूचना देने वालों को इनाम देने की व्यवस्था भी की गई है।
डीएसपी सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि ठियोग क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में 1.700 किलोग्राम चिट्टा जब्त किया गया है। चिट्टे की एक डोज 5 से 10 हजार रुपये में बिकती है। उन्होंने कहा कि वे अब तक करीब दो हजार नशे के आदी युवाओं से मिल चुके हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक ने माना कि पहली डोज दोस्त के कहने पर ली, जिसके बाद वे नशे की गिरफ्त में फंस गए।



