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धर्मशाला: तीन महीने बाद मैक्लोडगंज लौटे दलाई लामा, गगल से मुख्य बौद्ध मंदिर तक उमड़ा आस्था का सैलाब

तीन महीने बाद मैक्लोडगंज लौटे दलाई लामा

गगल से मैक्लोडगंज तक जगह-जगह श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत

स्वागत मार्ग के गड्ढों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल


धर्मशाला। करीब ढाई से तीन महीने के लंबे प्रवास के बाद तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा शुक्रवार को अपने स्थायी निवास मैक्लोडगंज लौट आए। दिल्ली में बाएं घुटने की सफल रिप्लेसमेंट सर्जरी और उसके बाद लद्दाख प्रवास पूरा करने के बाद शुक्रवार सुबह उनका गगल हवाई अड्डे पर आगमन हुआ। धर्मगुरु की वापसी की खबर के साथ ही धर्मशाला और मैक्लोडगंज में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बन गया। गगल हवाई अड्डे से लेकर मैक्लोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर तक सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे।

दलाई लामा के स्वागत के लिए तिब्बती समुदाय के लोगों और स्थानीय अनुयायियों ने पारंपरिक तरीके से तैयारियां की थीं। लोगों ने पारंपरिक खाता, अगरबत्तियों और पुष्पों के साथ उनका अभिनंदन किया। गगल हवाई अड्डे पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के वरिष्ठ अधिकारी, निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्य, भिक्षु और बड़ी संख्या में स्थानीय अनुयायी मौजूद रहे।

धर्मगुरु के काफिले के मैक्लोडगंज की ओर बढ़ने के साथ रास्ते में भी लोगों की भीड़ दिखाई दी। कई स्थानों पर श्रद्धालु उनके दर्शन और स्वागत के लिए सड़क किनारे खड़े रहे। लंबे अंतराल के बाद दलाई लामा की अपने स्थायी निवास लौटने की तस्वीरों और स्वागत के माहौल ने धर्मशाला की फिजाओं को एक बार फिर आध्यात्मिक रंग दे दिया।

जून में दिल्ली के लिए रवाना हुए थे दलाई लामा

दलाई लामा जून में धर्मशाला से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। 8 जून को दिल्ली में उनके बाएं घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई थी। सर्जरी के बाद चिकित्सकीय देखरेख में स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद उन्होंने आगे की यात्रा की।

स्वास्थ्य में सुधार के बाद 28 जून को वह लेह पहुंचे। इसके बाद उन्होंने करीब 69 दिन लद्दाख में बिताए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, श्रद्धालुओं को प्रवचन दिए और विशेष प्रार्थना सभाओं में शामिल हुए। बड़ी संख्या में अनुयायियों ने उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद लिया।

लद्दाख प्रवास के दौरान धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के बाद अब दलाई लामा की मैक्लोडगंज वापसी हुई है। उनके स्थायी निवास लौटने से स्थानीय तिब्बती समुदाय और उनके अनुयायियों में खासा उत्साह नजर आया।

गगल हवाई अड्डे पर मौजूद रहे अधिकारी और भिक्षु

दलाई लामा के गगल पहुंचने से पहले ही वहां स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे थे। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्य भी मौजूद रहे। भिक्षुओं और स्थानीय अनुयायियों ने पारंपरिक तरीके से धर्मगुरु का स्वागत किया।

हवाई अड्डे से बाहर निकलने के बाद उनके काफिले के मैक्लोडगंज की ओर बढ़ते ही सड़क के दोनों तरफ लोगों की मौजूदगी बढ़ती गई। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। लंबे समय बाद धर्मगुरु की वापसी के कारण स्थानीय लोगों के लिए यह एक विशेष अवसर बन गया।

मैक्लोडगंज में आस्था और उत्साह का माहौल

दलाई लामा के मैक्लोडगंज पहुंचने पर मुख्य बौद्ध मंदिर क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। उनके अनुयायियों के लिए यह वापसी केवल एक धार्मिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि अपने आध्यात्मिक गुरु के फिर से उनके बीच लौटने का अवसर था।

स्वागत के दौरान पारंपरिक खाता और पुष्प अर्पित किए गए। अगरबत्तियों के साथ श्रद्धालुओं ने धर्मगुरु के प्रति अपनी आस्था और सम्मान व्यक्त किया। लंबे समय से दलाई लामा की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए शुक्रवार का दिन भावनात्मक और खास रहा।

स्वागत की तैयारियों के बीच सड़क की बदहाली भी सामने आई

दलाई लामा की वापसी के बीच जहां एक तरफ मैक्लोडगंज में स्वागत और आस्था का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ स्वागत मार्ग की बदहाली ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।

धर्मशाला-मैक्लोडगंज मार्ग पर नेशनल हाईवे-503 में सेंट जॉन चर्च के पास सड़क पर कई गहरे गड्ढे दिखाई दिए। इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो गई थी। दलाई लामा के काफिले और उनके स्वागत के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सड़क की यह स्थिति चिंता का विषय बनी।

प्रशासन की ओर से समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं होने पर तिब्बती समुदाय के लोगों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। लोगों ने फावड़े और तसले उठाए और सड़क के गड्ढों में मिट्टी तथा मलबा डालकर उन्हें समतल करने का प्रयास किया।

लोगों ने खुद संभाली सड़क सुधार की जिम्मेदारी

दलाई लामा के स्वागत के लिए आने वाले लोगों और उनके काफिले को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय तिब्बती समुदाय के लोगों ने खुद सड़क की स्थिति सुधारने का प्रयास किया। सड़क के गड्ढों में मिट्टी और मलबा डालकर रास्ते को चलने योग्य बनाया गया।

यह दृश्य एक तरफ दलाई लामा के प्रति स्थानीय समुदाय की श्रद्धा और जिम्मेदारी को दिखाता नजर आया, तो दूसरी तरफ सड़क की खराब स्थिति को लेकर प्रशासन पर सवाल भी खड़े करता रहा। जिस मार्ग से धर्मगुरु का काफिला गुजरना था, वहां गहरे गड्ढों का होना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना।

तीन महीने बाद हुई वापसी, अब मैक्लोडगंज में रहेंगे

दलाई लामा की यह वापसी करीब ढाई से तीन महीने बाद हुई है। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में घुटने की सर्जरी करवाई और स्वास्थ्य लाभ के बाद लद्दाख में लंबा प्रवास किया। 28 जून से करीब 69 दिनों तक लद्दाख में रहने के बाद अब वह अपने स्थायी निवास मैक्लोडगंज लौटे हैं।

उनकी वापसी के साथ ही धर्मशाला और मैक्लोडगंज में उनके अनुयायियों के बीच खुशी का माहौल है। शुक्रवार को गगल से मैक्लोडगंज तक हुए स्वागत ने यह भी दिखाया कि दलाई लामा के प्रति स्थानीय तिब्बती समुदाय और उनके अनुयायियों की आस्था कितनी गहरी है।