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डलहौजी: बेसहारा मासूमों की गुहार, क्या इन बच्चों को मिलेगा उज्ज्वल भविष्य?

➤ चंबा जिले के मटवाड़ गांव में चार नाबालिग बच्चे बिना माता-पिता के जीने को मजबूर
➤ 17 वर्षीय बहन ने भाई-बहनों के लिए छोड़ी पढ़ाई, 15 साल का भाई कर रहा मजदूरी
➤ मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में, मदद की आस जगी


डलहौजी क्षेत्र के अंतर्गत जिला चंबा की ग्राम पंचायत भजोत्रा के गांव मटवाड़ से एक दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां चार नाबालिग भाई-बहन हालातों की मार झेलने को मजबूर हैं।

इन मासूमों के पिता का मार्च 2022 में निधन हो गया था। इसके बाद मां ने दूसरी शादी कर ली और बच्चों को छोड़कर चली गई। तभी से ये चारों बच्चे बिना माता-पिता, बिना संरक्षण और बिना किसी स्थायी सहारे के जीवन गुजार रहे हैं।

सबसे बड़ी बेटी 17 वर्षीय निशा को अपने छोटे भाई-बहनों के पालन-पोषण के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी, जबकि वह आगे पढ़ना चाहती थी। परिवार का गुजारा चलाने के लिए 15 वर्षीय छोटा भाई बाहर काम करने को मजबूर है, ताकि घर का चूल्हा जल सके।

इन बच्चों का आशियाना मिट्टी का छोटा सा घर है, जिसमें एक ही कमरे में मवेशी और बच्चे साथ रहते हैं। न पक्की छत, न बुनियादी सुविधाएं और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा। यह स्थिति सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज जब दुनिया विकास की ऊंचाइयों की बात कर रही है, वहीं इन मासूमों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि समाज आज भी पिछड़े दौर में जी रहा है।

निशा ने बताया कि “पिता की मौत के बाद हम चारों अकेले रह रहे हैं। घर के हालात ऐसे हैं कि मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। मेरा छोटा भाई काम करता है। अब तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। हम बेसहारा बच्चों की मदद की जाए।”

जानकारी के अनुसार, मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से मामला सामने आने के बाद प्रशासन बच्चों की सुध लेने गांव पहुंचा। अब इन मासूमों को सरकारी मदद और संरक्षण मिलने की उम्मीद जगी है।