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धर्मशाला कॉलेज छात्रा मौत मामला: यूजीसी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी परिसर पहुंची, रैगिंग व यौन उत्पीड़न आरोपों की जांच तेज

➤ धर्मशाला कॉलेज में छात्रा मौत मामले की जांच के लिए यूजीसी की पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति पहुंची
➤ रैगिंग, यौन उत्पीड़न, छात्रा सुरक्षा और यूजीसी नियमों के पालन की गहन पड़ताल
➤ सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी, मेडिकल बोर्ड गठन की प्रक्रिया भी शुरू


धर्मशाला। राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला की छात्रा की मौत और उससे जुड़े रैगिंग व यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों की जांच के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी मंगलवार को कॉलेज परिसर पहुंची। यह पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति छात्रा से जुड़े घटनाक्रम के हर पहलू की गहन जांच कर रही है।

यूजीसी ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. राज कुमार मित्तल को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। समिति में यूजीसी की पूर्व सदस्य प्रो. सुषमा यादव, गुजरात विश्वविद्यालय अहमदाबाद की कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता और पुदुचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. प्रकाश बाबू शामिल हैं। यूजीसी की संयुक्त सचिव डॉ. सुनीता सिवाच इस समिति की समन्वय अधिकारी हैं।

समिति ने पहले दिन कॉलेज परिसर का निरीक्षण किया और प्राचार्य सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकों व कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच में यह भी परखा जा रहा है कि छात्राओं की सुरक्षा, रैगिंग रोकथाम, और यौन उत्पीड़न से जुड़े यूजीसी नियमों का कॉलेज प्रशासन ने किस हद तक पालन किया।

समिति तीन दिन तक कॉलेज में रहकर छात्राओं, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत करेगी। साथ ही रैगिंग निरोधक तंत्र, आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी), छात्र सहायता प्रणाली और सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति का मौके पर मूल्यांकन किया जाएगा। यूजीसी ने निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी कर सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट व सिफारिशें आयोग को सौंपी जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके

इधर, प्रदेश सरकार के निर्देश पर शिक्षा विभाग की ओर से गठित उच्चस्तरीय जांच समिति दो दिवसीय दौरा पूरा कर लौट चुकी है। कॉलेज परिसर में जांच को लेकर हलचल बनी हुई है। छात्र-छात्राओं को उम्मीद है कि पीड़िता को न्याय मिलेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, वहीं स्वयं को निर्दोष बताने वाले पक्ष भी निष्पक्ष जांच की अपेक्षा जता रहे हैं।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी निर्धारित समय दोपहर दो बजे के बजाय सायं सवा चार बजे परिसर पहुंची, जिससे कॉलेज स्टाफ को देर शाम तक रुकना पड़ा और विशेष रूप से महिला कर्मचारियों को असुविधा झेलनी पड़ी।

मामले में मृतक छात्रा के पिता के बयान धर्मशाला में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए हैं। वहीं, छात्रा के इलाज से जुड़े आठ अलग-अलग अस्पतालों से पूरा मेडिकल रिकॉर्ड जुटा लिया गया है। अब प्रदेश सरकार और डीजीपी कार्यालय से समन्वय कर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा, ताकि मौत के कारणों का विस्तृत विश्लेषण हो सके।